ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग में भरे जाएंगे 2500 पद

ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग में भरे जाएंगे 2500 पद

मनरेगा में एकमुश्त 60 रुपए बढ़ाने वाला पहला राज्य’मनरेगा 92,041 परिवारों को मिला 120 दिनों का रोजगार

हमारी पंचायत, शिमला

शिमला:हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सरकार 11 दिसंबर को दो साल का कार्यकाल पूरा कर रही हैं, ऐसे में सुक्खू सरकार नए साल में युवाओं को सरकारी नौकरी का तोहफा देने जा रही है। इसके लिए ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 2500 पद भरे जाएंगे। इसको लेकर जल्द ही कैबिनेट की बैठक में मामला लाया जाएगा।

ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा, “ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग में खाली पदों को लेकर प्रपोजल मांगा गया है. जिसके बाद जल्द ही कैबिनेट में स्वीकृति लेकर खाली पदों को भरने के लिए प्रक्रिया शुरू की जाएगी।”

अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने जनता से जो वादे किए हैं, उन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है।प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही सबसे पहली ओपीएस गारंटी को पूरा किया गया, इसी तरह से वर्तमान सरकार ने ₹680 करोड़ की राजीव गांधी स्टार्टअप योजना के वादे को पूरा किया है, जिसमें ई-टैक्सी खरीदने पर सरकार 50 फीसदी का अनुदान देगी।

इसके अलावा पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई शुरू की गई है। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर में सुधार होगा।वहीं, इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना को लागू किया गया है, जिससे महिलाओं आर्थिक तौर पर समृद्ध हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह से वर्तमान सरकार ने गाय के दूध पर खरीद मूल्य 45 रुपए और भैंस के दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य 55 रुपए लीटर किया है।

वहीं, प्राकृतिक खेती से तैयार मक्की और गेहूं की फसल पर सर्वाधिक न्यूनतम मूल्य देने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य है। प्रदेश सरकार ने विधवा के बच्चों की पढ़ाई के लिए मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना शुरू की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 31 मार्च 2026 तक हिमाचल को हरित राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है।

”ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि मनरेगा में एक मुश्त 60 रुपए दिहाड़ी बढ़ाने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य बन गया है। प्रदेश में मनरेगा की दिहाड़ी को 240 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए किया गया है।हिमाचल में मनरेगा के तहत वर्ष 2023-24 में 1283.83 करोड़ और साल 2024-25 में अब तक 1860.49 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं, इसी तरह से 2024-25 ने अब तक 229.75 लाख कार्य दिवस अर्जित किए जा चुके हैं।

इस अवधि में कुल कार्य दिवस में महिलाओं की भागीदारी 64 फीसदी रही है, इसी तरह से मनरेगा के तहत होने वाले कार्य और दिहाड़ी का समय पर भुगतान किया जा रहा है।अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि हिमाचल में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त करने के लिए लोगों ने मनरेगा को हाथों हाथ लिया है, जिससे ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।

प्रदेश में 92,041 परिवारों ने 120 दिन का रोजगार प्राप्त किया है, वहीं, अप्रैल 2023 से अब तक 98,602 परिवारों को 100 दिनों का रोजगार दिया गया है। मनरेगा के अंतर्गत अप्रैल 2023 से अब तक 1,90,788 कार्य पूरे किए गए हैं। इसी तरह से मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत दो सालों में 12.99 करोड़ की लागत से बनने वाले 777 आवास स्वीकृत किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि 1 जनवरी, 2023 से अब तक 9,355 गांव ओडीएफ (खुले में शौचमुक्त) मॉडल श्रेणी में घोषित किए गए हैं। 1 जनवरी, 2023 से अब तक 13,989 घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया है. इसी तरह से 2,173 सामुदायिक स्वच्छता परिसरों का निर्माण किया गया है।

इसके अलावा 14,362 गावों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधियां शुरू की गई हैं। अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि 103 हिमईरा स्थाई दुकानों व 77 हिमईरा साप्ताहिक बाजारों में 1 जनवरी, 2023 से अक्टूबर, 2024 तक 52.60 करोड़ रुपये के उत्पादों की बिक्री की गई। हिमाचल में 1.14 करोड़ की लागत से 150 पंचायत घरों का निर्माण किया जा रहा है।

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