हमारी पंचायत
बारहवीं (इंटर) पास करने के बाद कान्हा की नगरी मथुरा युवा फुटबॉल क्लब के लड़कों ने बैंगलौर में आयोजित फुटबॉल टूर्नामेंट खेलने का फैसला किया। युवाओं द्वारा लिया गया संकल्प परिवार के भूतपर्व युवाओं को नागवार गुजरा।
टीम के अगवा सूरज को बैंगलोर जाने के लिए अनुशसित कड़क फ़ौजी पिता से पैसे तो दूर, इजाजत भी नहीं मिली। बड़े भाई ने भी समझा दिया कि पापा ने न कह दिया है तो नहीं जाना है। उम्मीद के साथ माँ से पैरवी की, लेकिन बेटे की ज़िद पति के फरमान तले दब गई और पिता के फैसले के साथ हो गई।
आखिरी उम्मीद बड़ी बहन से बात की और 3 हज़ार की डिमांड रखी गई, बहन ने कहा, “भाई तुम्हारे लिए 3 क्या मैं 10 हज़ार भेज देती हूँ, लेकिन ये तो बता कि पापा से इजाजत मिली ?” पापा की मनाही के आगे बहन ने भी हौसले के हथियार पीछे खिंच दिए और अपनी मज़बूरी बयान की, भाई जैसा सभी कहते हैं वैसा ही कर, सभी तेरे भले के लिए बोल रहे हैं।”
युवा मन ने विद्रोह कर दिया और जाने की ज़िद्द पकड़ ली। पिता ने गुस्से में कह दिया, “जाना है तो जाओ पैसा एक भी नहीं मिलेगा।” सभी दोस्तों ने स्वदेशी फार्मूला जुगाड़ करके घर से निकले और बैंगलौर पहुँच गए। बैंगलौर की चकाचोंध में खुदको चक दे इंडिया टीम के खिलाडी से कम नहीं आंक रहे थे। गंतव्य पर पहुँच कर पता चला कि टूर्नामेंट कैंसिल हो गया है।
बड़े जोश और उम्मीद से आए थे लेकिन अब काटो तो खून नहीं। दिल में जितना जोश खेलने और जीतने का था अब दिमाग में उसे ज्यादा बोझ इस बात का था कि अब कहाँ जाएं ? कहाँ रहे…? खाने के भी वांदे पड़ सकते हैं। बाहर निकले तो देखा सड़क पर युवाओं का सैलाब उमड़ा हुआ था। पता चला कि फ़ौज में क्लेरिकल भर्ती की दौड़ हो रही है और देशभर से युवा भर्ती के लिए आये हैं। किसी ने तंज कसा कि बड़े खिलाड़ी बनते हैं, दौड़ने की हिम्मत भी है..?
सभी ने तय कर दिया कि हम भी दौड़ेंगे और दौड़ में शामिल हो गए। बतौर फुटबॉलर दौड़ने का अनुभव काम आया और 13 साथियों ने समय से पहले दौड़ पूरी कर दी। एक साथी फिनिश लाइन से 5-6 मीटर पहले लड़खड़ाकर गिर गया। अपने साथी को गिरता देख सभी दुखी हो गए तो सूरज लाइन के अंदर चला गया और अपने साथी को खींचकर फिनिश लाइन से बाहर ले आया।
निरीक्षक सूबेदार ने डांट के साथ 2 फौजी थप्पड़ रसीद किये और दोनों के एक ओर खड़ा कर दिया। अंत में जब भर्ती इंचार्ज कैप्टन साहब आये और उन्होंने पूछा कि ये दो नमूने साइड में क्यों खड़े किए हैं तो सूबेदार ने बताया कि जनाब ये बड़े चालाक हैं, एक अंदर गिर गया था तो दूसरा उसे खिंचता हुआ बाहर लेकर आया।
कर्नल ने रॉब के साथ पूछा, “ऐसा क्यों किया….? क्या फ़ौज का डिसीप्लेन मालूम नहीं है ?” सूरज ने जवाब दिया, “सर.. अपना साथी है, ऐसे कैसे छोड़ देते। ये गिर गया था, वर्ना दौड़ता हमसे भी तेज है।” कर्नल को जवाब जम गया, सूबेदार से बोला, “इन नमूनों को भी अंदर कर दे।”
अब सभी के रहने, खाने और सोने का जुगाड़ हो गया था। रोज ट्रेनिंग, स्पोर्ट्स इवेंट आदि कुछ न कुछ चलता रहता। बात अब डोकोमेंटशन की आयी, मेट्रिक के सर्टिफिकेट लगने थे और घर पर भी नहीं बताना था। आखिर भला को मोबाइल दुनिया का, किसी ने इमेल पर तो किसी ने व्हाट्सप्प पर अपने डॉक्यूमेंट लेकर जमा कर दिए।
अंत में रिटन टेस्ट हुआ और आई टी सिटी बैंगलौर को अलविदा कहने का समय आ गया। घर पहुंचे तो पापा ने गेट पर ही मोटिवेशनल थप्पड़ से स्वागत किया। माँ.. पिता के चंगुल से छुड़ाकर बेटे को घर के अंदर ले गयी। पिता ने जब पूछा कि इतने दिन कहां सोए ..? जवाब मिला सड़क किनारे। क्या खाया ..? ढाबे में बर्तन धोए और खाना खाया।
हर सवाल का जो भी मन किया जवाब दे दिया। क्योंकि इतने दिन परिवार वालों का एक भी फोन नहीं आया, किसी ने पूछा भी नहीं कि ज़िंदा है या घट गया, जबकि एक छोटका फोन मेरे पास था। आखिर बात आई – गई हो गई। कुछ दिन बाद एक साथी का फोन आया कि उसका फ़ौज में सलेक्शन हो गया है, और किसका हुआ इसका पता नहीं है।
अपने एक साथी को कॉल किया, जिसके घर में इंटरनेट था। उसने भी एक अन्य साथी के साथ लिस्ट बांचनी शरू की। थ्री इडियट की तरह उन्हें भी अंत में अपने नाम तो मिल गए लेकिन बाकी साथियों के नहीं मिले। निराश होकर पुनः शुरु से देखने लगे तो बारी – बारी से सभी 14 साथियों के नाम लिस्ट में मिल गए। घर पर कॉल लेटर भी आ गया था। सही कहा है “होइहि सोइ जो राम रचि राखा”। अब घर के सभी लोग स्तब्ध थे की ये कैसे हुआ। अंततः सूरज ने परिवार को पूरी घटना बताई।
मथुरा के ये सभी 14 जवान देश सेवा कर रहे हैं। मित्र आचार्य नरेन्द्र के साथ माता कामाख्या के दर्शन कर वापसी के दौरान ट्रेन में बिंदास सहयात्री फ़ौजी सूरज से मुलाकात हुई।
कहते है फ़ौजी के बेटा – बेटी भी किसी योद्धा से कम नहीं होते। सूरज की प्रेमिल स्वभाव से अभिसंचित सार्थक सोच, सैन्य परंपरा के प्रति दृढ़ संकल्पित, मातृभूमि से प्रेम और कर्तव्यनिष्ठा ने हमारे हृदय को स्पर्शित किया। जांबाज़ और हरफनमौला अंदाज़ वाले सूरज सहित सभी साथीयों को हार्दिक शुभकामनाएं !

