हमारी पंचायत, देहरादून
उत्तराखंड राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने पर पूरे प्रदेश में रजत जयंती समारोह धूमधाम से मनाया जा रहा है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह उत्सव केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी का पर्व है। यह उत्तराखंड की आत्मा, संघर्ष, संस्कृति और संकल्प का उत्सव है, जिसमें हर नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य की स्थापना के पीछे जो सपना था — स्वावलंबी, सशक्त और आत्मनिर्भर उत्तराखंड — अब उसे अगले 25 वर्षों में मूर्त रूप देने का समय है। “विकसित उत्तराखंड 2050” के रोडमैप के माध्यम से सरकार ने समग्र विकास की दिशा तय की है।
विश्व तक पहुँच रहा उत्तराखंड का गौरव
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य स्थापना दिवस 9 नवम्बर से लेकर 11 नवम्बर 2025 तक पूरे प्रदेश में रजत जयंती उत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। “इगास पर्व से शुरू होकर यह आयोजन उत्तराखंड की परंपरा, लोकसंस्कृति और आंदोलन के इतिहास को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम बनेगा।”
उन्होंने कहा कि यह पर्व राज्य के हर नागरिक, युवा, प्रवासी उत्तराखंडी, किसान, महिला, छात्र और आंदोलनकारी का है। इसके जरिए सरकार यह संदेश दे रही है कि उत्तराखंड के विकास में साझेदारी और सहभागिता ही वास्तविक शक्ति है।
“विकसित भारत 2047” से प्रेरित “विकसित उत्तराखंड 2050”
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के संकल्प से प्रेरणा लेकर उत्तराखंड ने “विकसित उत्तराखंड 2050” की रूपरेखा तैयार की है। इस रोडमैप में शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, ऊर्जा, पर्यटन, कृषि, पलायन रोकथाम और सीमांत विकास जैसे सभी क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि आने वाले 25 वर्ष उत्तराखंड के लिए निर्णायक होंगे — “यह समय आत्ममंथन और नए संकल्पों का है। हमें ऐसा उत्तराखंड बनाना है जो प्रकृति के संरक्षण के साथ प्रगति का प्रतीक बने।”
जनाकांक्षाओं का उत्सव
मुख्यमंत्री ने कहा कि रजत जयंती का यह उत्सव जनता की आकांक्षाओं का प्रतीक है। इसमें सरकारी विभागों के साथ जन संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, पंचायत प्रतिनिधियों और युवाओं को सक्रिय रूप से जोड़ा गया है।
उन्होंने बताया कि हर जिले में सांस्कृतिक कार्यक्रम, विकास प्रदर्शनियाँ और आंदोलनकारियों का सम्मान समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। “हम चाहते हैं कि नई पीढ़ी अपने राज्य के इतिहास और संघर्ष से परिचित हो और आगे बढ़ने की प्रेरणा ले।”
विकास, सुशासन और पारदर्शिता पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड ने सुशासन और पारदर्शिता के क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। राज्य ने देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर महिलाओं और समाज के हर वर्ग के अधिकारों को मजबूती दी है।
इसके अलावा नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी अधिनियम और भूमि कानूनों में सुधार से प्रशासनिक व्यवस्था अधिक सुदृढ़ हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा — “हमारी सरकार जनता की आस्था और हित दोनों की रक्षा के लिए कटिबद्ध है।”
रोजगार, निवेश और आर्थिक सबलीकरण
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि राज्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़े हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के दौरान 3.56 लाख करोड़ रुपये के एमओयू साइन हुए, जिनमें से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट ज़मीन पर उतर चुके हैं।
पिछले चार वर्षों में 26 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियाँ दी गईं। आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत और महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण प्रदान कर अवसरों का दायरा बढ़ाया गया है।
महिला सशक्तिकरण की ओर बढ़ता राज्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएँ विकास की धुरी हैं। “लखपति दीदी योजना” के तहत अब तक 1.65 लाख महिलाएँ आत्मनिर्भर बनी हैं। आयुष्मान योजना के तहत 58 लाख कार्ड वितरित किए जा चुके हैं और हर ज़रूरतमंद को निःशुल्क स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जा रही है। राज्य में वृद्धावस्था पेंशन को 1500 रुपये प्रति माह किया गया है और मातृ स्वास्थ्य में सुधार के लिए अनेक योजनाएँ शुरू की गई हैं।
बुनियादी ढाँचा और पर्यटन में ऐतिहासिक प्रगति
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 25 वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था 26 गुना और प्रति व्यक्ति आय 17 गुना बढ़ी है। राज्य में चल रही दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, ऋषिकेश- कर्णप्रयाग रेल परियोजना, ऑल वेदर रोड, बद्रीनाथ मास्टर प्लान और मानसखण्ड मंदिर माला मिशन जैसी परियोजनाएँ उत्तराखंड को नई ऊँचाइयों पर ले जा रही हैं। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ अब राज्य एडवेंचर, इको और वेलनेस टूरिज्म का केंद्र बन रहा है।
पलायन रोकथाम और सीमांत विकास पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पलायन रोकने के लिए सरकार ने विशेष योजनाएँ चलाई हैं। मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमांत गाँवों में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएँ बढ़ाई जा रही हैं।
“हम ऐसा उत्तराखंड बनाना चाहते हैं जहाँ लोग अवसरों की तलाश में राज्य से बाहर न जाएँ, बल्कि बाहर के लोग यहाँ निवेश करने और बसने आएँ।”
‘स्वर्णिम उत्तराखंड’ का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि रजत जयंती आत्ममंथन का समय है। “हमारे आंदोलनकारियों के बलिदान, जनता के संघर्ष और युवाओं की मेहनत से यह राज्य बना है। अब इसे स्वर्णिम बनाने की जिम्मेदारी हम सबकी है।”
उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे विकास की इस यात्रा में सहभागी बनें, “जनभागीदारी ही सच्चा विकास है। जब जनता और सरकार साथ चलते हैं, तब उत्तराखंड आगे बढ़ता है।”


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