हेम भट्ट से घंटों पूछताछ पर विपक्ष हमलावर, कार्रवाई के तरीके पर उठे सवाल
हमारी पंचायत, देहरादून
वरिष्ठ पत्रकार हेम भट्ट को शनिवार तड़के पुलिस द्वारा घर से पूछताछ के लिए ले जाने की घटना ने प्रदेश की राजनीति और पत्रकारिता जगत में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। परिवार के आरोपों, विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रियाओं और सोशल मीडिया पर उठे सवालों के बीच यह मामला दिनभर चर्चा का विषय बना रहा। लंबी पूछताछ के बाद देर शाम पुलिस ने हेम भट्ट को छोड़ दिया।
परिजनों के अनुसार सुबह करीब चार बजे पुलिस टीम घर पहुंची और हेम भट्ट को अपने साथ ले गई। उनकी पत्नी दिव्या जोशी ने आरोप लगाया कि टीम में केवल एक व्यक्ति वर्दी में था, जबकि बाकी लोग सादे कपड़ों में थे। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने घर में छोटे बच्चों के सामने अभद्र व्यवहार किया और मोबाइल फोन भी अपने साथ ले गई। परिवार का कहना है कि कार्रवाई के दौरान कोई स्पष्ट दस्तावेज या सर्च वारंट नहीं दिखाया गया।
घटना सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन की ओर से सफाई दी गई। एसपी सिटी ने वीडियो बयान जारी कर कहा कि जमीन धोखाधड़ी के आरोपी और 20 हजार रुपये के इनामी अभियुक्त प्रदीप सकलानी से पूछताछ के दौरान कुछ संदिग्ध नाम सामने आए थे, जिनमें हेम भट्ट का नाम भी शामिल था। इसी आधार पर उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया।
पुलिस के अनुसार प्रदीप सकलानी के खिलाफ देहरादून के विभिन्न थानों में जमीन धोखाधड़ी के 26 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं, जबकि कई चेक बाउंस मामले भी अदालतों में लंबित हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान जिन लोगों की भूमिका संदिग्ध लग रही है, उनसे पूछताछ की जा रही है और इसी क्रम में हेम भट्ट से भी जानकारी ली गई।
हालांकि, इस कार्रवाई ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। बताया जा रहा है कि एक दिन पहले ही हेम भट्ट ने भाजपा विधायक अरविंद पांडे का इंटरव्यू किया था, जिसमें जमीन से जुड़े मामलों को लेकर सरकार और जांच एजेंसियों पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों और पत्रकार संगठनों ने संदेह जताया है।
भाजपा विधायक अरविंद पांडे ने कहा कि यदि किसी पत्रकार से पूछताछ करनी थी तो कानूनसम्मत और गरिमापूर्ण तरीका अपनाया जाना चाहिए था। उन्होंने पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग की। वहीं युवा नेता बॉबी पंवार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारिता से जुड़ा गंभीर मामला बताया।
कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे दमनात्मक रवैया बताया। वहीं कांग्रेस नेत्री सुजाता पॉल ने नेहरू कॉलोनी थाने पहुंचकर परिवार से मुलाकात की और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
इस बीच सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कई पत्रकारों और सामाजिक संगठनों ने कहा कि किसी भी पत्रकार से पूछताछ पूरी कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। लोगों ने सवाल उठाए कि यदि किसी व्यक्ति को केवल पूछताछ के लिए बुलाना था तो तड़के घर से ले जाने जैसी कार्रवाई की आवश्यकता क्यों पड़ी।
वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है तथा पूछताछ के लिए बुलाया जाना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।


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