हमारी पंचायत, देहरादून
देश के प्रथम व सीमांत गांव माणा में हिमस्खलन की चपेट में आने से कुल मृतकों की संख्या आठ हो गयी है। इस जानलेवा एवलांच में 46 मजदूर बचा लिए गए। रविवार की शाम करीब पौने छह बजे लापता आठवें श्रमिक का शव बरामद किया गया। इसी के साथ बर्फीले इलाके में चला बचाव अभियान रविवार की शाम को थम गया।

शुक्रवार को बार्डर रोड आर्गेनाईजेशन (बीआरओ ) की रोड निर्माण में जुटे 54 श्रमिक भारी एवलांच आने से बर्फ में दब गए थे। यह बचाव अभियान चमोली जिले के लगभग दस से बारह हजार फीट की ऊंचाई वाले बर्फीले इलाके में किया गया। बदरीनाथ धाम से आगे माणा गांव के आस पास व आगे 7 फ़ीट से ज्यादा बर्फ गिरी हुई है।
इस हादसे की जानकारी मिलते ही सीएम धामी ने दून से लेकर जोशीमठ तक जमीनी कवायद की। जोशीमठ में घायल मजदूरों से मिले और प्रभावित इलाके का हवाई दौरा कर बचाव अभियान पर कड़ी निगरानी रखी। बचाव दल ने भारी बर्फ के बीच रास्ता बनाते हुए हेलीकॉप्टर के जरिये मजदूरों को लिफ्ट किया।

सीएम धामी ने माणा हादसा मिशन कम्प्लीट होने पर सभी बचाव दल समेत प्रशासन के अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारी बर्फबारी की वजह से यह बचाव अभियान काफी चुनौतीपूर्ण था। और सभी के सहयोग से यह काम सम्पन्न हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, सीमा सड़क संगठन और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों की सराहना की।
सरकार भारतीय सेना के साथ ही सभी सैनिकों और कर्मियों की सराहना करती है जिन्होंने प्रतिकूल मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थिति को पार करते हुए इस बचाव कार्य को अंजाम दिया। दूसरी ओर, हादसे में मृत श्रमिकों का पोस्टमार्टम कर उनकी पार्थिव देह को परिजनों को सौंपा जा रहा है। दुर्घटना में मृत व घायल मजदूरों को राज्य सरकार ने मुआवजे की घोषणा की है।

