गांधी दर्शन में नव वर्ष कला उत्सव 2026 का भव्य आयोजन

गांधी दर्शन में नव वर्ष कला उत्सव 2026 का भव्य आयोजन

डॉ. शुभ्रा नाग की कृतियों ने खींचा सबका ध्यान

हमारी पंचायत,दिल्ली

राजधानी के प्रतिष्ठित गांधी दर्शन आर्ट गैलरी में अजला फाउंडेशन द्वारा ‘नव वर्ष कला उत्सव 2026’ का भव्य और गरिमामयी आयोजन किया गया। ‘विक्रम संवत 2083’ के उपलक्ष्य में आयोजित इस बहु-दिवसीय कला उत्सव में भारतीय सांस्कृतिक चेतना और समकालीन कला का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने कला प्रेमियों और दर्शकों को खासा आकर्षित किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ संजीव किशोर गौतम (महानिदेशक, नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट) के कर-कमलों द्वारा किया गया। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की विशेष उपस्थिति रही, जिन्होंने भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण और कला की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में प्रख्यात आर्ट क्यूरेटर कविता राजपूत और लुबना सेन ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

उत्सव का मुख्य आकर्षण प्रख्यात कलाकार डॉ. शुभ्रा नाग की पेंटिंग्स रहीं, जिन्होंने अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति से सभी का मन मोह लिया। उनकी कृतियों में भारतीय संस्कृति, प्रकृति और आध्यात्मिक संवेदनाओं का सूक्ष्म और प्रभावशाली चित्रण देखने को मिला। अतिथियों ने उनकी कला में रंगों की सघनता, रेखाओं की लयात्मकता और भावों की गहराई की सराहना करते हुए इसे भारतीय दर्शन के ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के भाव का सजीव प्रतिबिंब बताया।

उत्सव के दौरान ‘द आर्ट ऑफ वेदिक वे ऑफ लाइफ’ और ‘नेशनल कल्चरल रेजुवेनेशन’ जैसे समसामयिक विषयों पर पैनल चर्चा भी आयोजित की गई। रमेश पोखरियाल निशंक ने अपने संबोधन में कहा कि कला समाज को दिशा देने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है। वहीं, क्यूरेटर कविता राजपूत और लुबना सेन ने डॉ. शुभ्रा नाग की कृतियों को परंपरा और आधुनिकता के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बताया।

आयोजकों के अनुसार, इस कला उत्सव का उद्देश्य उभरते और स्थापित कलाकारों को एक सशक्त मंच प्रदान करना तथा भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना है। बहु-दिवसीय इस आयोजन में बड़ी संख्या में कला प्रेमियों ने भाग लिया और विभिन्न कलाकृतियों का अवलोकन किया। ‘नव वर्ष कला उत्सव 2026’ ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति को जोड़ने वाली सशक्त कड़ी भी है।

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