हमारी पंचायत, देहरादून
शिक्षा के केंद्र के रूप में पहचान रखने वाला देहरादून (दून) आज नशे की चपेट में तेजी से फंसता जा रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों से प्रोफेशनल कोर्स करने के लिए दून पहुंचने वाले युवा नशा तस्करों के निशाने पर हैं। कुछ युवा जल्दी पैसा कमाने की लालच में तो कुछ नशे की लत के कारण इस अवैध कारोबार में शामिल हो रहे हैं। नशा तस्कर युवाओं को प्रलोभन देकर उन्हें तस्करी के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे युवा पीढ़ी नशे के दलदल में धंसती जा रही है।
दून में पढ़ाई के लिए आने वाले अधिकांश युवा किराए के मकानों या पीजी में रहते हैं, जहां उन पर परिवार की कोई बंदिश नहीं होती। इस आजादी का फायदा उठाकर नशा तस्कर उन्हें पहले शौकिया तौर पर नशे की लत लगाते हैं और फिर उन्हें तस्करी में पैडलर के रूप में इस्तेमाल करते हैं। तस्कर सस्ते दामों पर नशा उपलब्ध कराते हैं, जिसे युवा महंगे दामों पर बेचकर मुनाफा कमाते हैं। इस मुनाफे का एक हिस्सा पैडलरों को भी दिया जाता है, जिससे वे इस धंधे में और गहराई तक फंसते जाते हैं।
दून पुलिस ‘ड्रग फ्री उत्तराखंड’ अभियान के तहत नशा तस्करों के खिलाफ लंबे समय से कार्रवाई कर रही है। इस अभियान के तहत कई तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पकड़े गए अधिकांश तस्कर 18-35 वर्ष की आयु के युवा हैं। पूछताछ में इन युवाओं ने बताया कि पैसा कमाने और नशे की लत को पूरा करने के लिए उन्होंने तस्करी शुरू की। नशा तस्करों के संपर्क में आने के बाद उनकी जरूरतों ने उन्हें इस अवैध कारोबार में धकेल दिया।
नशे का स्रोत: बरेली और सहारनपुर
पुलिस जांच में सामने आया है कि देहरादून में स्मैक और अन्य नशीले पदार्थ मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली और सहारनपुर से लाए जाते हैं। तस्कर इन जगहों से सस्ते दामों पर नशा खरीदकर दून में महंगे दामों पर बेचते हैं। पकड़े गए तस्करों ने असल तस्करों के नाम भी पुलिस को बताए हैं, लेकिन बड़े तस्कर अभी भी पुलिस की पहुंच से बाहर हैं।
दून के एसएसपी अजय सिंह ने लोगों से अपील की है कि वे नशे से दूरी बनाएं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा, “नशा तस्करी से संबंधित किसी भी जानकारी को तुरंत पुलिस के साथ साझा करें। हमारा लक्ष्य उत्तराखंड को नशा मुक्त बनाना है।”
नशे की बढ़ती समस्या को देखते हुए परिजनों को अपने बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। युवाओं को नशे के खतरों के बारे में जागरूक करना और उनकी गतिविधियों पर नजर रखना जरूरी है, ताकि वे इस दलदल में फंसने से बच सकें।
नशा तस्करी न केवल युवाओं के भविष्य को खतरे में डाल रही है, बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर चुनौती बन रही है। पुलिस का ‘ड्रग फ्री उत्तराखंड’ अभियान इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है।

