हमारी पंचायत, देहरादून
उत्तराखंड के मोरी विकासखंड के फिताड़ी गांव में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना में कई परिवारों के घर, अनाज भंडार और पशुधन जलकर पूरी तरह नष्ट हो गए। आग की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ ही घंटों में ग्रामीणों की वर्षों की मेहनत राख में बदल गई। घटना को एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन प्रभावित परिवार अब भी राहत और पुनर्वास के इंतजार में हैं, जिससे स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश और निराशा देखने को मिल रही है।

ग्रामीणों के अनुसार, इस अग्निकांड में दर्जनों घर प्रभावित हुए हैं और कई परिवार पूरी तरह बेघर हो गए हैं। अनाज के भंडार जल जाने से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में पशुधन आय का प्रमुख स्रोत होता है, ऐसे में पशुओं के नुकसान ने आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, इस आग से लाखों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है, हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
इस आपदा ने क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं की कमजोर हकीकत को भी उजागर कर दिया है। गांव तक बमुश्किल सड़क तो पहुंची है, लेकिन उसकी स्थिति बेहद खराब है, जिससे आवागमन में भारी दिक्कत होती है। अग्निशमन सेवाओं की बात करें तो मोरी ब्लॉक में यह अब भी किसी दिवास्वप्न से कम नहीं है। सड़क और संचार व्यवस्था कमजोर होने के कारण समय पर राहत और बचाव कार्य नहीं पहुंच पाते, जिससे नुकसान और बढ़ जाता है। गौरतलब है कि क्षेत्र में आज भी कई ऐसे गांव हैं जो सड़क मार्ग से नहीं जुड़े हैं और जहां संचार सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।

इसी बीच, पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने फिताड़ी गांव पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उनका हाल जाना। उन्होंने पीड़ितों को सांत्वना देते हुए कहा कि इस कठिन समय में वे उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को कम से कम 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता तत्काल दी जाए, ताकि वे अपने जीवन को फिर से पटरी पर ला सकें।
प्रीतम सिंह ने यह भी सुझाव दिया कि वन विभाग द्वारा जंगलों में गिरे पेड़ों को प्रभावित परिवारों को आवंटित किया जाए। पहाड़ी इलाकों में लकड़ी मकान निर्माण का प्रमुख साधन होती है, जिससे पुनर्निर्माण कार्य में मदद मिल सकेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उचित सहायता नहीं दी गई, तो प्रभावित परिवारों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि घटना के कई दिन बाद भी कोई वरिष्ठ मंत्री या अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जो प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में उच्च स्तर पर त्वरित हस्तक्षेप जरूरी होता है।
इस दौरान कई स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद रहे और उन्होंने भी शीघ्र राहत व पुनर्वास की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना है कि तत्काल आर्थिक सहायता, अस्थायी आवास और खाद्य सामग्री की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
फिताड़ी गांव का यह अग्निकांड न केवल एक मानवीय त्रासदी है, बल्कि यह पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और आपदा प्रबंधन की कमजोरियों को भी उजागर करता है। अब देखना यह है कि सरकार कितनी तेजी से कदम उठाकर पीड़ितों को राहत पहुंचाती है और उनके पुनर्वास को सुनिश्चित करती है।
