सीएम धामी के निर्देश पर पुलिस द्वारा चलाया जा रहा एक विशेष अभियान
हमारी पंचायत, देहरादून
उत्तराखंड सरकार ने बहरूपियों की गिरफ़्तारी को लेकर ऑपरेशन कालनेमि शुरू किया है। पिछले डेढ़ माह के दौरान पुलिस ने कुल 5500 से अधिक लोगो का सत्यापन किया है, जहां 14 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। साथ ही 1182 व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की गई है। ऑपरेशन कालनेमि में सबसे ज्यादा मामले 2704 हरिद्वार जनपद में सामने आए हैं। गिरफ्तार लोगों में कुछ बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल हैं जो वर्षों से राज्य में अवैध रूप से रह रहे थे। इन पर फर्जी बाबा बनकर लोगों को धोखा देने, छलपूर्वक धार्मिक रूपांतरण कराने और फर्जी दस्तावेजों के जरिए पहचान छिपाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। बांग्लादेशी व्यक्ति को हिरासत में लेकर वापस भेजा गया है।
उत्तराखंड पुलिस द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य राज्य की धार्मिक पवित्रता को बनाए रखना और फर्जी साधु-संतों के नेटवर्क को खत्म करना है। देवभूमि कहे जाने वाले इस प्रदेश में हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें बाबाओं की आड़ में लोग ठगी और धर्मांतरण जैसे अपराधों में लिप्त पाए गए। ऑपरेशन कालनेमि के दौरान प्रवक्ता पुलिस हेडक्वार्टर और आईजी लॉ एंड आर्डर नीलेश आनंद भरणे ने आंकड़ों को जारी करते हुए स्पष्ट किया कि ऑपरेशन कालनेमि लगातार जारी रहेगा। साथ ही अब निशाने पर सोशल मीडिया भी होगी जहां पर फेक आईडी बनाकर गलत काम किया जा रहा है।
‘ऑपरेशन कालनेमि’ अभियान फर्जी साधु-संतों, ढोंगी बाबाओं, पीर-फकीरों और बहुरूपियों के खिलाफ है, जो धार्मिक भेष धारण करके लोगों को ठगते हैं, धार्मिक भावनाओं का शोषण करते हैं, धर्मांतरण करवाते हैं या अन्य अपराधों में लिप्त रहते हैं। इसका नाम रामायण के राक्षस “कालनेमि” से प्रेरित है, जो छल-कपट से हनुमान जी पर हमला करने वाला था और जिसका भेद खुलने के बाद बजरंगबली ने उसका वध कर दिया था। यह अभियान देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को बचाने के लिए “सभ्यतागत रक्षा” का प्रतीक है। अभियान चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और सावन जैसे पर्वों के दौरान विशेष रूप से सक्रिय है, जिसमें आधार कार्ड सत्यापन, एआई निगरानी (हरिद्वार में 350+ कैमरे) और चेकपॉइंट जांच शामिल हैं।
उत्तराखंड में 5500 से ज्यादा का हुआ सत्यापन
जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड पुलिस ने अभियान के तहत प्रदेश भर में 5500 से ज़्यादा लोगों का सत्यापन किया है। इसमें सबसे ज्यादा 2704 व्यक्तियों का सत्यापन हरिद्वार जिले में किया गया, जिसमें तीन लोगों को गिरफ़्तार किया गया। वहीं देहरादून ज़िले में 922 व्यक्तियों का सत्यापन किया गया और पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही अन्य ज़िलों में भी कार्रवाई की गई है।
आस्था के साथ विश्वासघात करने वालों को पुलिस की चेतावनी
आईजी कानून व्यवस्था नीलेश आनंद भरणे ने कहा कि ऑपरेशन कालनेमि ने समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया है। उत्तराखंड पुलिस ऐसे किसी भी तत्व को बर्दाश्त नहीं करेगी जो देवभूमि की पवित्रता और लोगों की आस्था के साथ विश्वासघात करने की कोशिश करेगा। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन कालनेमि के माध्यम से पुलिस का संदेश स्पष्ट है कि समाज और संस्कृति से खिलवाड़ करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ऑपरेशन कालनेमि के तहत कार्रवाई जारी
बता दें ऑपरेशन कालनेमि का मुख्य उद्देश्य और सामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई करना है, जो अपनी वास्तविक पहचान छुपाकर समाज में घुल मिलकर धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे थे और ठगी, धोखाधड़ी और धर्मांतरण अपराधों को अंजाम दे रहे हैं।
पुलिस महानिरीक्षक निलेश आनंद ने बताया पूरा लेखा जोखा
पुलिस महानिरीक्षक निलेश आनंद भरणे के अनुसार, जुलाई से शुरू हुए इस अभियान के दौरान अब तक 5500 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ की जा चुकी है। इनमें से 1182 के खिलाफ कार्रवाई की गई, जबकि 14 को गिरफ्तार किया गया है। ये गिरफ्तारियां हरिद्वार, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, अल्मोड़ा और नैनीताल सहित कई जिलों से हुई हैं।
इफराज बन गया ‘राज आहूजा’
गिरफ्तार आरोपियों में एक बांग्लादेशी मुस्लिम नागरिक भी शामिल है, जो पिछले आठ सालों से देहरादून के सेलाकुई इलाके में बंगाली डॉक्टर अमित कुमार के नाम से रह रहा था। उसके पास फर्जी दस्तावेज पाए गए हैं। इसके अलावा, कश्मीर के अनंतनाग निवासी इफराज अहमद लोलू को भी गिरफ्तार किया गया है, जो अपनी असली पहचान छिपाकर ‘दिल्ली का अमीर बिजनेसमैन राज आहूजा’ बनकर महिलाओं को धोखा दे रहा था।
गौरतलब है कि उत्तराखंड के सीएम उसका सिंह धामी ने जुलाई में “ऑपरेशन कालनेमि” की शुरुआत की थी। जुलाई से सितंबर 2025 तक की उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। आंकड़े अभी तक की गई पुलिसिया कार्रवाई से संकलित हैं, और अभियान निरंतर चल रहा है, इसलिए संख्या बढ़ सकती है। कुल मिलाकर, अब तक 5,500 से अधिक सत्यापन हो चुके हैं, 300 से अधिक गिरफ्तारियां हुई हैं, और 1,182 से अधिक निरोधात्मक कार्रवाइयाँ की गई हैं।
10 जुलाई 2025: अभियान की शुरुआत
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्यव्यापी अभियान की घोषणा की। उद्देश्य: फर्जी बाबाओं को पकड़ना जो चारधाम यात्रा के दूसरे चरण के दौरान तीर्थयात्रियों का शोषण कर रहे थे। जूना अखाड़ा और अखंड परशुराम अखाड़ा जैसे संगठनों ने समर्थन दिया और साधुओं के लिए आधार सत्यापन की मांग की। शुरुआती निर्देश: सभी जिलों में पुलिस को सतर्क रहने और संदिग्धों की दस्तावेज़ जांच करने के आदेश।
12-13 जुलाई 2025: प्रारंभिक कार्रवाइयाँ और पहली बड़ी गिरफ्तारियाँ
अभियान शुरू होने के 48 घंटों के भीतर 50 से अधिक ढोंगियों को गिरफ्तार किया गया। देहरादून में 144 गिरफ्तारियाँ, हरिद्वार में 50, और उधम सिंह नगर में 65 फर्जी बाबा पकड़े गए। कुल 259 गिरफ्तारियाँ दर्ज की गई, जिसमें 23 अन्य राज्यों से थे। एक प्रमुख घटना: देहरादून में बांग्लादेशी नागरिक रुकमा राकम उर्फ शाह आलम को हिंदू साधु के भेष में गिरफ्तार किया गया, जो ठगी और पहचान छिपाने का दोषी था। उधम सिंह नगर में 66 पीर-फकीर पकड़े गए। सोशल मीडिया पर #OperationKalnemi ट्रेंड करने लगा, और देशभर से समर्थन मिला।
14 जुलाई 2025: 100 से अधिक गिरफ्तारियाँ और विस्तार
कुल गिरफ्तारियाँ 100 से अधिक हो गईं। अभियान को “सनातन संस्कृति की रक्षा” के रूप में प्रचारित किया गया। हरिद्वार कांवड़ मार्ग पर भगवा वेश में ठगी करने वाले 38 पाखंडी पकड़े गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि की पवित्रता पर कोई समझौता नहीं होगा।
15 जुलाई 2025: 200 से अधिक ढोंगी जेल पहुंचे
राज्य में 200 से अधिक फर्जी बाबा जेल भेजे गए। अभियान ने लव जिहाद, लैंड जिहाद और थूक जिहाद जैसे मुद्दों पर भी फोकस किया। मीडिया पर सीएम धामी ने अभियान की आवश्यकता समझाई, जिसमें उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम (2018) का उल्लेख किया गया।
25 जुलाई 2025: मध्य-जुलाई की प्रगति
13 जिलों में 2,448 संदिग्ध साधुओं का सत्यापन। 377 विशेष संदिग्ध चिह्नित, और 140 से अधिक फर्जी साधु गिरफ्तार। हरिद्वार में सबसे अधिक कार्रवाई। अभियान को ऐतिहासिक बताया गया, जो समाज में विश्वास जगाने वाला साबित हुआ।
अगस्त 2025 (मध्य तक): विस्तार और अंतरराष्ट्रीय तत्वों पर कार्रवाई
कुल सत्यापन 4,000 से अधिक हो गए। गिरफ्तारियाँ 300 से अधिक।
प्रमुख जिले:-
हरिद्वार: 2,301 सत्यापन, 162 गिरफ्तारियाँ।
देहरादून: 865 सत्यापन, 113 गिरफ्तारियाँ (शाह आलम सहित)।
उधम सिंह नगर: 167 सत्यापन, 17 गिरफ्तारियाँ।
एक बांग्लादेशी नागरिक को पहचान सत्यापन के बाद बीएसएफ के सहयोग से निर्वासित किया गया। पौड़ी गढ़वाल में 7 साधु वेशधारी गिरफ्तार। अभियान में ठगी, धोखाधड़ी और धर्मांतरण के मामलों का पर्दाफाश हुआ।
31 अगस्त – 5 सितंबर 2025: हालिया गिरफ्तारियाँ
ऑपरेशन के तहत 3 फर्जी बाबा गिरफ्तार, जो महिलाओं और युवाओं को गुमराह कर रहे थे। उधम सिंह नगर और अन्य जिलों में निरंतर चेकिंग।
6-7 सितंबर 2025: वर्तमान स्थिति और नई पहल
अभियान के प्रमुख उद्देश्य और प्रभाव
पहचान छिपाकर अपराध करने वालों (ठगी, धर्मांतरण, शोषण) की पहचान। देवभूमि की धार्मिक छवि बचाना। 82 फर्जी बाबा पकड़े गए (प्रारंभिक आंकड़े), लेकिन कुल 300+। सोशल मीडिया पर ट्रेंड, राष्ट्रीय समर्थन। जून अखाड़ा ने आधार अनिवार्य करने की मांग की, कोई बड़ा विवाद नहीं, लेकिन असामाजिक तत्वों पर अंकुश।

