नई वित्तीय शक्तियाँ के साथ मज़बूत होंगी पंचायतें

नई वित्तीय शक्तियाँ के साथ मज़बूत होंगी पंचायतें

ग्राम स्तर पर विकास कार्य तेज़ करने की योजना
हमारी पंचायत, देहरादून

उत्तराखंड में ग्राम पंचायतों को अधिक वित्तीय अधिकार देकर स्थानीय स्तर के विकास कार्यों को गति देने की दिशा में सरकार ठोस पहल की तैयारी में है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पंचायतों को छोटे और मध्यम स्तर के आधारभूत कार्यों के लिए उच्चतर व्यय स्वीकृति सीमा, निधियों के उपयोग में अधिक लचीलापन तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में बढ़ी प्रशासनिक स्वायत्तता देने पर विभागीय स्तर पर विचार चल रहा है।

इसका उद्देश्य यह है कि ग्राम स्तर की आवश्यकताओं—जैसे पेयजल मरम्मत, आंतरिक मार्ग सुधार, जलनिकासी, सामुदायिक भवन रखरखाव और सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था के लिए पंचायतों को बार-बार ब्लॉक या जिला स्तर की स्वीकृति प्रक्रिया से न गुजरना पड़े और कार्य समय पर पूरे हो सकें।

वर्तमान व्यवस्था में ग्राम पंचायतों के वित्तीय अधिकार सीमित होने के कारण अनेक स्थानीय कार्य स्वीकृति प्रक्रियाओं में लंबित रह जाते हैं। पंचायतीराज विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, कम लागत वाले कार्यों के लिए भी तकनीकी परीक्षण और वित्तीय अनुमोदन की बहु-स्तरीय प्रक्रिया अपनानी पड़ती है, जिससे कार्य आरंभ होने में लंबा समय लग जाता है।

प्रस्तावित संशोधन में पंचायतों की व्यय स्वीकृति सीमा बढ़ाने, ग्राम निधि के उपयोग दायरे का विस्तार करने और स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाने जैसे उपाय शामिल किए जा सकते हैं। इससे पंचायत स्तर पर निर्णय-क्षमता बढ़ेगी और स्थानीय समस्याओं का समाधान त्वरित होगा।

ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पंचायतों की भूमिका पहले से केंद्रीय है। मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता कार्यक्रम जैसे अनेक कार्य ग्राम पंचायतों के माध्यम से संचालित होते हैं, किंतु पूरक स्थानीय आवश्यकताओं के लिए स्वतंत्र वित्तीय निर्णय की कमी महसूस की जाती रही है।

विभागीय आकलनों में यह पाया गया है कि योजनाओं के निर्माण और रखरखाव संबंधी छोटे कार्य समय पर न होने से परिसंपत्तियों की गुणवत्ता प्रभावित होती है और अतिरिक्त लागत बढ़ती है। यदि पंचायतों को निर्धारित सीमा तक स्वयं व्यय स्वीकृति का अधिकार दिया जाता है, तो योजनाओं का स्थानीय समन्वय बेहतर होगा और रखरखाव कार्यों में तेजी आएगी।

पंचायत प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों की बैठकों में भी वित्तीय अधिकार विस्तार की मांग लगातार उठती रही है। उनका कहना है कि ग्राम स्तर की समस्याएँ तत्काल समाधान चाहती हैं, जबकि वर्तमान प्रणाली में प्रस्ताव तैयार करने, तकनीकी स्वीकृति और वित्तीय अनुमोदन तक कई प्रशासनिक स्तरों से गुजरना पड़ता है।

इससे पेयजल पाइपलाइन मरम्मत, छोटे पुलिया निर्माण, मार्ग सुधार या जलनिकासी जैसे कार्यों में महीनों की देरी हो जाती है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता है और विकास कार्यों की उपयोगिता घटती है।

प्रस्तावित ढाँचे में पंचायतों को कुछ श्रेणी के विकास कार्यों के लिए पूर्व-स्वीकृत मदों में व्यय की अनुमति देने, पंचायत निधियों के उपयोग में प्राथमिकता निर्धारण का अधिकार और सीमित स्थानीय संसाधन संग्रहण के प्रावधानों पर भी विचार हो रहा है। इसके साथ ही वित्तीय अधिकारों के विस्तार के साथ पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन लेखांकन प्रणाली, सामाजिक लेखा परीक्षण और नियमित ऑडिट व्यवस्था को अनिवार्य बनाने की योजना भी शामिल की जा सकती है। इससे विकेंद्रीकरण और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास होगा।

विकेंद्रीकरण की नीति के अनुरूप ग्राम पंचायतों को “स्थानीय सरकार” के रूप में सशक्त करने पर लंबे समय से बल दिया जाता रहा है। इसी क्रम में राज्य स्तर पर वित्तीय अधिकारों के पुनर्संतुलन की आवश्यकता महसूस की गई है, ताकि पंचायतें स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुसार त्वरित निर्णय ले सकें। विभागीय सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव का प्रारंभिक मसौदा तैयार कर वित्त और प्रशासनिक परीक्षण के लिए उच्च स्तर पर भेजे जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

ग्रामीण अवसंरचना के रखरखाव और छोटे विकास कार्यों की समयबद्धता पंचायतों की वित्तीय क्षमता से सीधे जुड़ी मानी जा रही है। उपलब्ध विभागीय अनुभवों में यह संकेत मिला है कि जिन क्षेत्रों में पंचायत निधियों के उपयोग में लचीलापन रहा, वहाँ स्थानीय स्तर के कार्य अपेक्षाकृत तेजी से पूरे हुए और परिसंपत्तियों का रखरखाव बेहतर रहा। इसी अनुभव और पंचायत प्रतिनिधियों की मांगों के आधार पर पंचायतों को नई वित्तीय शक्तियाँ देने की दिशा में सहमति बनती दिखाई दे रही है।

2 Comments

  1. I’m very happy to read this. This is the type of manual that needs to be given and not the accidental misinformation that is at the other blogs. Appreciate your sharing this best doc.

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