परमार्थ निकेतन में स्वामी आनंद अरुण के सानिध्य में हजारों साधकों की अंतर्यात्रा
हमारी पंचायत, ऋषिकेश
देवभूमि ऋषिकेश इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा से स्पंदित है। गंगा तट स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित 7वां ‘ओशो मेघा शिविर’ देश-विदेश से आए हजारों साधकों के लिए आत्म-खोज का विराट मंच बन गया है। पाँच दिवसीय इस गहन ध्यान शिविर में भारत और नेपाल सहित विभिन्न स्थानों से ओशो अनुयायी और जिज्ञासु भाग ले रहे हैं।

शिविर की विशेषता है—ध्यान और उत्सव का अनूठा समन्वय। ओशो की सक्रिय ध्यान (डायनेमिक मेडिटेशन) और कुंडलिनी ध्यान जैसी विधियों के माध्यम से साधकों को भीतर उतरने का अवसर मिल रहा है। गंगा की लहरों और हिमालय की शांत उपस्थिति के बीच सामूहिक ध्यान का वातावरण साधकों को गहरे मौन की अनुभूति करा रहा है।
शिविर का प्रमुख आकर्षण ‘शक्तिपात’ सत्र रहा, जिसे साधकों ने अत्यंत भावपूर्ण अनुभव बताया। स्वामी आनंद अरुण के मार्गदर्शन में ध्यान की गहन अवस्था में पहुँचे साधकों ने इसे आत्म-रूपांतरण की तीव्र प्रक्रिया के रूप में अनुभव किया। कई प्रतिभागियों का कहना है कि यह शिविर उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हो रहा है।
इच्छुक साधकों के लिए दीक्षा समारोह भी आयोजित किया गया, जहाँ नव-संन्यास का संकल्प लेते हुए अनेक लोगों ने नए जीवन की शुरुआत की। स्वामी आनंद अरुण ने अपने प्रवचनों में प्रेम, जागरूकता और आंतरिक स्वतंत्रता का संदेश देते हुए कहा कि ध्यान केवल साधना नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।

शिविर के दौरान सामूहिक कीर्तन, मौन साधना और संवाद सत्रों ने वातावरण को और भी ऊर्जावान बना दिया। आश्रम परिसर में हर ओर शांति, संगीत और ध्यान की गूंज सुनाई दे रही है।
आयोजन के समापन अवसर पर स्वामी आनंद अरुण ने आश्रम परिवार और सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। गंगा तट पर सजी यह आध्यात्मिक संगम साधकों के लिए लंबे समय तक प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
