पंचायत चुनाव पर लग सकता है चारधाम यात्रा का ब्रेक

संशोधित रोस्टर से बदले हिमाचल पंचायत चुनाव समीकरण


हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद नई आरक्षण सूची जारी, कई जिलों में बदले समीकरण

हमारी पंचायत, शिमला

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर लंबे समय से जारी असमंजस के बीच अब संशोधित आरक्षण रोस्टर जारी कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने पहले जारी रोस्टर को निरस्त कर नई सूची जारी की है, जिससे चुनावी समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

दरअसल, अदालत ने उपायुक्तों को 5 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण लागू करने के अधिकार पर रोक लगाते हुए सरकार को नया रोस्टर जारी करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रदेशभर में नए सिरे से पंचायत प्रधान, वार्ड सदस्य, बीडीसी सदस्य और जिला परिषद वार्डों के लिए आरक्षण तय किया गया है। कुल मिलाकर करीब 55 प्रतिशत सीटें आरक्षित की गई हैं, जबकि महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण मिलने से सामान्य (ओपन) सीटों का दायरा घटकर लगभग 45 प्रतिशत रह गया है। हालांकि, उपप्रधान पद के लिए सभी वर्गों के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई है।

राजधानी शिमला में मंगलवार देर रात संशोधित रोस्टर जारी किया गया, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। वहीं, कांगड़ा जिला में परागपुर पंचायत समिति का रोस्टर एक ही दिन में बदले जाने से सियासी हलचल बढ़ गई है। नई सूची में कई वार्डों की श्रेणियां बदलने से चुनावी गणित पूरी तरह बदल गया है।

इसी तरह कुल्लू जिला में भी पंचायत प्रधान, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद वार्डों के आरक्षण में संशोधन कर अंतिम सूची जारी कर दी गई है। सिरमौर जिला में उपायुक्त ने 6 अप्रैल को जारी अधिसूचना को निरस्त कर नई अधिसूचना लागू कर दी है। मंडी जिला में जिला परिषद के 36 वार्डों में से 18 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं, जबकि शेष सीटों को विभिन्न वर्गों में बांटा गया है। हमीरपुर जिला में 242 पंचायतों का रोस्टर जारी कर कई वार्डों के आरक्षण में बदलाव किया गया है।

आरक्षण रोस्टर को लेकर प्रदेश में लगातार बदलते फैसलों ने प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। पहले 2010 के आधार पर रोस्टर लागू करने का निर्णय लिया गया, फिर लगातार दो बार आरक्षित रही पंचायतों को इस बार अनारक्षित करने की बात कही गई। इसके बाद उपायुक्तों को 5 प्रतिशत सीटों में बदलाव का अधिकार दिया गया, जिसे अब हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।

इसी बीच, राज्य सरकार के उच्च अधिकारी इस मामले में आगे की रणनीति पर विचार कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना पर भी मंथन जारी है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस विषय पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।

दूसरी ओर, पंचायत चुनावों के चलते जनगणना प्रक्रिया पर भी असर पड़ा है। भारत की जनगणना 2027 के पहले चरण की तिथियों में बदलाव किया गया है। अब राज्य में हाउस लिस्टिंग और आवासीय जनगणना का कार्य 16 जून से 15 जुलाई 2026 तक किया जाएगा, जबकि पहले यह प्रक्रिया 12 मई से 11 जून तक प्रस्तावित थी। सरकार ने यह भी व्यवस्था की है कि इस बार नागरिक स्वयं भी अपने विवरण ऑनलाइन भर सकेंगे।

सरकार का कहना है कि तिथियों में बदलाव का उद्देश्य जनगणना को अधिक व्यवस्थित और सटीक बनाना है, ताकि हर परिवार का सही आंकड़ा दर्ज किया जा सके। मुख्य सचिव के निर्देशों के अनुसार सभी विभागों को नई समयसीमा के अनुसार तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा गया है।

5 Comments

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