राज्यभर में शोक की लहर, उपराष्ट्रपति, राजयपाल, मुख्यमंत्री धामी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
हमारी पंचायत, देहरादून
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय सेना के पूर्व मेजर जनरल बी.सी. खंडूड़ी का निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक, सामाजिक और सैन्य क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

बी.सी. खंडूड़ी लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे और अपनी सादगी, ईमानदार छवि तथा अनुशासित कार्यशैली के लिए पहचाने जाते थे। सेना से राजनीति में आने के बाद उन्होंने उत्तराखंड की राजनीति में अलग पहचान बनाई। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने पारदर्शिता, सड़क विकास और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने पूर्व मुख्यमंत्री के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि बी.सी. खंडूड़ी ने सैनिक और सार्वजनिक जीवन में अनुकरणीय सेवाएं दीं। उन्होंने कहा कि उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने भी शोक जताते हुए कहा कि बी.सी. खंडूड़ी अनुशासन, सादगी और राष्ट्रसेवा की मिसाल थे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने एक अनुभवी और सम्मानित जननेता को खो दिया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री के निधन को प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि बी.सी. खंडूड़ी का जीवन ईमानदारी, सेवा और जनसमर्पण का प्रतीक था। धामी ने कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने अपने पिता के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने जीवनभर सिद्धांतों और मूल्यों के साथ राजनीति की। उन्होंने कहा कि परिवार के साथ-साथ पूरा उत्तराखंड आज एक मार्गदर्शक व्यक्तित्व को खोने का दुख महसूस कर रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री के निधन की खबर मिलते ही उनके आवास पर नेताओं, अधिकारियों और समर्थकों का पहुंचना शुरू हो गया। प्रदेश के कई हिस्सों में शोक सभाओं और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उनके निधन को उत्तराखंड की राजनीति के लिए बड़ी क्षति बताया है।
बी.सी. खंडूड़ी को उत्तराखंड की राजनीति में एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने सादगी, अनुशासन और ईमानदारी को अपनी सबसे बड़ी पहचान बनाया।
