किसानों से संवाद और सहयोग के लिए उत्तराखंड पहुंचे अशोक यादव

किसानों से संवाद और सहयोग के लिए उत्तराखंड पहुंचे अशोक यादव

अखिलेश यादव और मायावती का कोई वज़ूद नहीं होगा 2027 में

सीएम धामी सहज और सरल नेता
उत्तराखंड से मेरा पुराना और गहरा नाता है

हमारी पंचायत, देहरादून

राष्ट्रीय लोकदल के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व पर्यटन एवं राजस्व मंत्री अशोक यादव ने देहरादून में आयोजित एक प्रेस वार्ता में कहा कि उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी के निर्देश पर उत्तराखंड भेजा गया है, ताकि राज्य में सरकार व किसानों के बीच और बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं, बल्कि किसानों के हित में सहयोग और संवाद को मजबूत करना है।

अशोक यादव ने कहा कि उनका किसानों से गहरा जुड़ाव रहा है और अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय उन्होंने “किसान अदालत” जैसी पहल की शुरुआत पुरानी टिहरी से की थी। इस पहल का उद्देश्य सरकार को सीधे किसानों के द्वार तक पहुंचाकर उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना था। इस मॉडल को उस समय देशभर में सराहना मिली और यहां तक कि केरल सरकार ने भी इसे अपनाया था।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड मूल रूप से गांवों और कृषि पर आधारित प्रदेश है। ऐसे में यदि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है तो इसका सीधा प्रभाव राज्य के समग्र विकास पर पड़ेगा। उन्होंने पलायन के मुद्दे पर भी चिंता जताते हुए कहा कि जब तक गांवों में रोजगार और कृषि से जुड़ी स्थिर आय नहीं होगी, तब तक पलायन को रोकना मुश्किल रहेगा।

अशोक यादव ने यह भी कहा कि सरकार और किसानों के बीच संवाद की कमी कई बार समस्याओं को जटिल बना देती है। ऐसे में जरूरी है कि जमीनी स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित हो और किसानों को उनके अधिकारों और योजनाओं का पूरा लाभ मिले। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में किसानों के साथ बैठकें और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि पहाड़ में चकबंदी एक जटिल प्रक्रिया है जबकि मैदानी क्षेत्र में यह सरलता से हो जाती है। 1998 में हमने टिहरी की किसान अदालत में चकबंदी की शुरुआत की थी जो आज तक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि तहसील के भुलेखों (खतौनी) का कम्प्यूटरीकरण उन्हीं के कार्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ था जो आज उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड तक करोड़ों लोगों के लिए सहूलियत की प्रक्रिया बन गई है।

उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि सीएम धामी एक सामान्य परिवार से आते हैं और सहज व सरल नेता है।

मायावती और अखिलेश यादव के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ये परिवार की पार्टी है संस्कार कि नहीं इसीलिए इनका कोई भविष्य नहीं है और 2027 के चुनाव में जनता उन्हें उनकी जगह दिखा देगी। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के 2027 आम चुनाव में दोनों प्रदेश की सरकार पुनः सत्ता में आएगी। उनका यह दौरा उत्तराखंड में किसान हितों को लेकर एक नए संवाद और सहयोग की पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो राज्य में कृषि आधारित विकास को नई दिशा दे सकता है।

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