मार्गदर्शक की भूमिका में हरीश रावत

मार्गदर्शक की भूमिका में हरीश रावत

हमारी पंचायत, देहरादून 

पूर्व सीएम हरीश रावत एक बार फिर कांग्रेस के अभिभावक और मार्गदर्शक की भूमिका में नजर आए। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की ताजपोशी के मौके पर भले ही हाईकमान ने उन्हें फ्रंट लाइन की जिम्मेदारी न दी हो, लेकिन हरदा अपने अनुभव और राजनीतिक समझ के साथ कांग्रेस के “पांच पांडवों” को जीत के गुर समझाते हुए पूरी तरह सक्रिय दिखे।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से जीत की ललक, भूख और जज्बा जगाने की अपील की। हरदा ने 2002 और 2012 की चुनावी जीत को उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस तब इसलिए सफल हुई क्योंकि कार्यकर्ताओं में जीतने की तड़प थी। साथ ही उन्होंने पार्टी के भीतर और बाहर एक-दूसरे की बुराई से बचने, एक-दूसरे की खूबियों को उजागर करने और “विष पुरुषों” से दूरी बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा—“जो विष है, वह मेरी जेब में डाल दो।”

हरदा ने कांग्रेस सरकार की 10 साल की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया—32 हजार नौकरियां, दो बार पटवारी भर्ती, मेडिकल व नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना, आईटीआई और पॉलिटेक्निक जैसे संस्थानों का विस्तार, और 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद किए गए कार्य। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि उनके शासन में एक भी नया मेडिकल या नर्सिंग कॉलेज नहीं खुला।

बिहार चुनाव परिणामों का जिक्र करते हुए हरदा ने कहा कि कांग्रेस की जिम्मेदारी अब और बढ़ गई है। उन्होंने चेताया कि यदि नेता फील्ड में सक्रिय नहीं हुए तो दूसरी पार्टियां उनकी जगह ले लेंगी। इसलिए उन्होंने कांग्रेस नेताओं से “गांडीव और सामाजिक न्याय की गदा” उठाकर भाजपा पर राजनीतिक प्रहार करने का आह्वान किया।

कार्यकर्ताओं को जोड़ने के लिए उन्होंने कुंती और गांधारी का उदाहरण दिया और कहा कि मातृशक्ति का आशीर्वाद हमेशा पांडवों के साथ रहा। NSUI और युवक कांग्रेस के नारे लगवाए और पंचमुखी रुद्राक्ष (गोदियाल, प्रीतम, हरक, आर्य, कापड़ी) को एकता का प्रतीक बताया।

इस बीच, हरक सिंह रावत के बढ़ते आक्रामक तेवरों पर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है। कांग्रेस की नई टीम के गठन के बाद उन्होंने सीएम धामी और पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत पर खुलकर हमला बोला। इसके चलते भाजपा रणनीतिकार उनकी घेराबंदी को लेकर सक्रिय हो गए हैं। भाजपा हरक सिंह को कांग्रेस की कमजोर कड़ी मानकर पुरानी जांचों और विवादों को फिर से जनता के सामने लाने की तैयारी में है।

हरक सिंह के आक्रामक बयान और वायरल वीडियो चुनावी माहौल को और गरमा रहे हैं। माना जा रहा है कि भाजपा की जवाबी रणनीति के बाद 2027 की चुनावी लड़ाई और भी दिलचस्प हो जाएगी।

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