हमारी पंचायत, शिमला
हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से टल रहे पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव अब तय समय सीमा के भीतर कराए जाएंगे। राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत लगाए गए सभी प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से वापस ले लिए हैं। यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद लिया गया है।
सरकार ने पूर्व में सड़क और संचार व्यवस्था में आई बाधाओं का हवाला देते हुए 8 अक्तूबर 2025 की अधिसूचना के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया स्थगित कर दी थी। प्राकृतिक आपदाओं के कारण कई क्षेत्रों में कनेक्टिविटी प्रभावित बताई गई थी। अब प्रशासन का कहना है कि प्रदेश में हालात काफी हद तक सामान्य हो चुके हैं और परिवहन तथा संचार सेवाएं बहाल हैं, इसलिए प्रतिबंध बनाए रखने का कोई ठोस आधार नहीं बचा था।
13 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग, पंचायती राज विभाग और शहरी विकास विभाग को निर्देश दिए कि चुनाव से जुड़ी सभी लंबित प्रक्रियाएं निर्धारित समय में पूरी की जाएं। अदालत ने स्पष्ट किया कि संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया 31 मई 2026 तक संपन्न कराना अनिवार्य होगा। इससे पहले हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन बाद में समय सीमा में संशोधन किया गया।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार ने आदेश की प्रतियां राज्यपाल सचिवालय, मुख्यमंत्री कार्यालय और सभी जिला उपायुक्तों को भेज दी हैं। प्रशासनिक स्तर पर चुनाव की तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। लंबे इंतजार के बाद अब प्रदेश में स्थानीय निकायों के माध्यम से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नया बल मिलने की उम्मीद है।

