इल्मा देवी की जिंदगी के ‘फरिश्ता’ बने डॉ. के.सी. शर्मा

इल्मा देवी की जिंदगी के ‘फरिश्ता’ बने डॉ. के.सी. शर्मा

6.3 किलो का ट्यूमर निकाल कर बचाई जान

हमारी पंचायत, देहरादून

देहरादून जिला अस्पताल कोरोनेशन में एक बार फिर चिकित्सकीय कौशल और मानवीय संवेदना का अद्भुत उदाहरण देखने को मिला, जब वरिष्ठ सर्जन डॉ. के.सी. शर्मा और उनकी टीम ने 65 वर्षीय इल्मा देवी का सफल ऑपरेशन कर उनकी जान बचाई।

टिहरी गढ़वाल के खटोली गांव निवासी इल्मा देवी पिछले कई महीनों से पेट में तेज दर्द और सूजन की समस्या से परेशान थीं। जांच में सामने आया कि उनके पेट में 6.3 किलोग्राम का विशाल ट्यूमर विकसित हो गया है। इतने बड़े आकार का ट्यूमर निकालना बेहद जोखिम भरा था, लेकिन डॉ. शर्मा और उनकी टीम ने हिम्मत और अनुभव का परिचय देते हुए यह जटिल सर्जरी सफलता पूर्वक पूरी की।

इल्मा देवी के नाती जतिन ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “डॉ. के.सी. शर्मा हमारे लिए किसी फरिश्ते से कम नहीं। उनकी मेहनत और अनुभव की वजह से ही मेरी दादी को नया जीवन मिला है।” ऑपरेशन के बाद अब इल्मा देवी पूरी तरह स्वस्थ हैं और धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रही हैं।

डॉ. के.सी. शर्मा जौनसार-बाबर की त्यूनी तहसील की खत देवघार के मेघाटू गांव के मूल निवासी हैं। वर्षों से वे प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों कोटद्वार, ऋषिकेश, विकास नगर व् देहरादून आदि में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और आजकल कोरोनेशन अस्पताल में बतौर वरिष्ठ सर्जन कार्यरत है। डॉ. शर्मा अपने सरल स्वभाव और उत्कृष्ट कार्यशैली के कारण वे मरीजों और सहकर्मियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।

अस्पताल प्रशासन ने भी टीम की इस सफलता की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को दर्शाती है। डॉ. शर्मा की यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा क्षेत्र के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी साबित करती है कि समर्पण और संवेदना से भरा डॉक्टर ही मरीज के लिए सच्चा “फरिश्ता” बन सकता है।

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