हमारी पंचायत, देहरादून
नवरात्रि से लेकर दीपावली के पावन पर्व तक उत्तर भारत में मां तारा फाउंडेशन जरूरतमंदों के जीवन में खुशियां बांटने का कार्य कर रही है। इस संस्था द्वारा गरीब बच्चों, माताओं और बहनों को नए वस्त्र, भोजन और निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

डॉ. समरजीत चौधरी के नेतृत्व में चल रही यह मुहिम समाज में सेवा और समर्पण की मिसाल बन चुकी है। पेशे से डॉक्टर होने के बावजूद डॉ. चौधरी अपनी निजी आय का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा गरीबों की सहायता में लगा देते हैं। उनके अनुसार, “जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य है कि कोई भी व्यक्ति भूखा, बीमार या लाचार महसूस न करे। जब तक सांस है, सेवा जारी रहेगी।”

मां तारा फाउंडेशन के इस अभियान के तहत दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, हरिद्वार, ऋषिकेश, मथुरा, वृंदावन, अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज सहित कई शहरों में निःशुल्क भोजन, वस्त्र, कंबल और दवाइयों का वितरण किया जा रहा है।
डॉ. चौधरी ने बताया कि आज प्राइवेट अस्पतालों की महंगी इलाज व्यवस्था आम जनता के लिए बोझ बन चुकी है। उन्होंने कहा,“डॉक्टर को भगवान कहा जाता है, मगर स्वास्थ्य सेवा अब व्यवसाय बन चुकी है। मेरी कोशिश है कि मरीज को इलाज के साथ इंसाफ भी मिले।”*
वे जन औषधि केंद्र योजना की भी सराहना करते हैं, जो सस्ती जेनरिक दवाइयां उपलब्ध कराकर लाखों परिवारों को राहत दे रही है। मां तारा फाउंडेशन भी मरीजों को ऐसी ही दवाइयां मुफ्त में उपलब्ध करा रही है ताकि गरीबों को आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।
डॉ. चौधरी ने समाज से अपील की कि हर व्यक्ति अपनी कमाई का एक छोटा हिस्सा सेवा कार्यों में लगाए। उन्होंने कहा, “अगर हर नागरिक यह संकल्प ले कि वह किसी जरूरतमंद की मदद करेगा, तो देश से गरीबी का नामोनिशान मिट जाएग।”

