धामी पर बरसा भगत दा का स्नेह
हमारी पंचायत, देहरादून
देहरादून। भाजपा की भीतरी खींचतान और सियासी उठापटक के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जमकर तारीफ की। धामी सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर आयोजित गोष्ठी में कोश्यारी का यह नया रुख कई संकेत छोड़ गया।
भाजपा के भीतर पिछले कुछ समय से असंतोष और बयानबाजी तेज रही है। पूर्व मुख्यमंत्रियों त्रिवेंद्र सिंह रावत और तीरथ सिंह रावत से लेकर वरिष्ठ नेता अरविंद पांडे, बिशन सिंह चुफाल और मुन्ना सिंह चौहान तक कई नेता सरकार पर अप्रत्यक्ष हमले करते रहे हैं। ऐसे माहौल में कोश्यारी का धामी के समर्थन में खुलकर सामने आना, भाजपा की आंतरिक राजनीति में अहम मोड़ माना जा रहा है।

गुरुवार को आयोजित इस कार्यक्रम में ‘नायक से जननायक’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इसी मौके पर कोश्यारी ने कहा कि “अगला दशक उत्तराखंड का तभी होगा जब मोदी और धामी की जोड़ी को मजबूत किया जाएगा।” उन्होंने धामी को प्रशासकीय और राजनीतिक दृष्टि से सफल मुख्यमंत्री बताते हुए कहा कि यह उनकी बड़ी उपलब्धि है कि न तो विपक्ष और न ही भाजपा कार्यकर्ता उनके निजी व्यवहार की आलोचना करते हैं।
कोश्यारी ने धामी की सरलता और विनम्रता को उनकी पहचान बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जरूरत पड़ने पर सख्त फैसले भी लेते हैं, लेकिन आमजन से मिलनसार व्यवहार बनाए रखते हैं। तुलसीदास के दोहे का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति में कठोर भाषा से बचना कठिन होता है, मगर धामी ने चार साल में यह संतुलन साधा है।

बैठक में दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने धामी सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की पहल को साहसिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद उत्तराखंड ने इसे लागू कर इतिहास रच दिया। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सफल क्रियान्वयन को सरकार की बड़ी उपलब्धि करार दिया।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर बोलते हुए यूकास्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि धामी सरकार नवाचार को प्रोत्साहित कर रही है। उनकी निगरानी में परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं और देश की पांचवीं साइंस सिटी अगले साल उत्तराखंड में स्थापित होगी।
मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह ने कहा कि नकल विरोधी सख्त कानून लाकर सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की है। वहीं, प्रो. हरीश चंद्र पुरोहित ने धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर धामी सरकार की प्रतिबद्धता की सराहना की। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हरिसुमन बिष्ट ने कहा कि यह पहला राज्य है जहां कलाकारों और साहित्यकारों को पुरस्कार के रूप में एक से पांच लाख रुपये तक दिए जा रहे हैं।

बैठक में वरिष्ठ पत्रकार विजेंद्र रावत, वैज्ञानिक आईएस नेगी, विधायक सुरेश गड़िया और विधायक सविता कपूर ने भी धामी सरकार की उपलब्धियों को गिनाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय खेलों जैसे बड़े आयोजनों से लेकर प्रवासी परिषद के माध्यम से प्रवासियों तक पहुंचने तक, सरकार ने कई प्रभावी कदम उठाए हैं।
संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद की उपाध्यक्ष मधु भट्ट ने मुख्यमंत्री धामी को संवेदनशील और विकासशील नेता बताया। दर्जाधारी राज्य मंत्री विनोद उनियाल ने भी सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन नीरज बवाड़ी ने किया और संयोजन मुख्यमंत्री के मीडिया समन्वयक मदन मोहन सती ने किया। इसी दौरान उनकी लिखित पुस्तक ‘नायक से जननायक पुष्कर सिंह धामी’ का विमोचन हुआ।
नवरात्र के दौरान संभावित कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं और दिल्ली-दून के राजनीतिक तापमान के बीच कोश्यारी का धामी पर बरसाया गया यह स्नेह न केवल पार्टी के भीतर नए समीकरणों की झलक देता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि भाजपा के भीतर अब धामी को और मजबूत करने की रणनीति आकार ले रही है।

