हमारी पंचायत, देहरादून
उत्तराखंड में एक बार फिर आंदोलन की आग भड़क उठी है। राज्य स्थापना दिवस के ठीक बाद सोमवार को करीब 22 हजार उपनलकर्मियों ने अपनी नियमितीकरण की मांग को लेकर देहरादून के परेड ग्राउंड में बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी है। युवा बेरोजगार आंदोलन के बाद यह प्रदेश का एक और बड़ा जन-आंदोलन बनकर उभर रहा है। सरकार की ओर से अब तक किसी ठोस पहल के अभाव में कर्मचारियों ने इसे “आरपार की लड़ाई” करार दिया है।
सरकार से टकराव की राह पर उपनलकर्मी
उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मी लंबे समय से नियमितीकरण और समान वेतन की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार ने कई बार वादे किए लेकिन नीतिगत निर्णय टालती रही। सोमवार सुबह से ही उपनल कर्मचारी परेड ग्राउंड में एकत्र हुए और नारेबाजी करते हुए स्थायीकरण की मांग उठाई। महासंघ ने साफ कहा कि अब “कोई वार्ता नहीं, केवल निर्णय” का समय है।
कोर्ट से सरकार तक अधर में उम्मीदें
उपनल कर्मचारी महासंघ के जिला अध्यक्ष अनिल गोसाई (रुद्रप्रयाग) ने कहा कि 2018 में हाईकोर्ट ने सरकार को चरणबद्ध तरीके से नियमितीकरण के आदेश दिए थे। सरकार ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली। इसके बावजूद अब तक कोई नीति लागू नहीं हुई। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीन बार सार्वजनिक रूप से नीति बनाने का आश्वासन दिया, फिर भी आठ माह बीत जाने के बाद शासनादेश जारी नहीं हुआ। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार अदालत और जनता दोनों के प्रति जवाबदेही से बच नहीं सकती।
दून अस्पताल में चरमराई व्यवस्था
हड़ताल का सबसे बड़ा असर राजधानी के दून अस्पताल में देखने को मिला। करीब 150 उपनल कर्मी, जिनमें नर्सें, वार्ड बॉय, फार्मासिस्ट, डेटा एंट्री ऑपरेटर और सफाईकर्मी शामिल हैं, काम पर नहीं पहुंचे। इससे बिलिंग काउंटर और रजिस्ट्रेशन कक्ष पर लंबी कतारें लग गईं, और मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा। हालांकि मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. आर.एस. बिष्ट ने कहा कि अस्पताल की व्यवस्थाएं “सामान्य” हैं और “वैकल्पिक व्यवस्था” लागू कर दी गई है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई वार्डों में सेवाएं सीमित हो गई हैं।
राज्यभर में असर, कई विभागों में ठप कामकाज
देहरादून ही नहीं, बल्कि उत्तरकाशी, टिहरी, चमोली, हरिद्वार और पौड़ी जिलों में भी कर्मचारियों ने हड़ताल का समर्थन करते हुए कामकाज ठप कर दिया। स्वास्थ्य, शिक्षा, वन, सिंचाई और ऊर्जा विभागों में कार्य प्रभावित हुआ है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को राज्यव्यापी स्वरूप दिया जाएगा।
मुख्य मांगें
1. सभी विभागों में कार्यरत उपनल कर्मियों का नियमितीकरण
2. समान कार्य के लिए समान वेतन नीति लागू हो
3. सेवा नियमावली का गठन
4. संविदा प्रणाली का अंत
सरकार के लिए नई परीक्षा
राज्य स्थापना दिवस की उत्सवधर्मिता के बीच यह आंदोलन सरकार के लिए नए जनदबाव की परीक्षा बन गया है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री धामी विकास के नए संकल्पों की बात कर रहे हैं, वहीं उपनल कर्मियों का यह विरोध यह सवाल उठा रहा है कि क्या राज्य का “स्थायी रोजगार मॉडल” अब भी अधर में है? सरकार को या तो स्पष्ट नीति लानी होगी या फिर एक और लंबे आंदोलन के लिए तैयार रहना होगा।

