हमारी पंचायत, देहरादून
उत्तराखंड पंचायत चुनावों को लेकर कांग्रेस पार्टी के लगाए आरोपों पर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस ने हाल ही में पंचायत चुनाव में नामांकन पत्रों से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग पर अनदेखी का आरोप लगाया था।
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से एक वीडियो साझा कर दावा किया था कि कई उम्मीदवारों के नाम एक से अधिक मतदाता सूची में मौजूद थे और आयोग ने इस पर कार्रवाई नहीं की। यहां तक कि पार्टी ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आयोग पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाए जाने की बात भी कही। कांग्रेस ने इसे “वोट चोरी” बताते हुए भाजपा और आयोग की मिलीभगत का आरोप लगाया।
इन दावों पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने फैक्ट चेक जारी कर कांग्रेस की पोस्ट को “ग़लत और भ्रामक” बताया। आयोग ने साफ किया कि पंचायत और नगरपालिका चुनाव भारत निर्वाचन आयोग नहीं, बल्कि राज्य निर्वाचन आयोग कराता है। संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए आयोग ने स्पष्ट किया कि उसकी जिम्मेदारी केवल संसद, राज्य विधानसभा और राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चुनाव तक सीमित है।
आयोग ने यह भी कहा कि पंचायत स्तर के चुनाव पूरी तरह से राज्य चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और इसी तथ्य को स्पष्ट करने के लिए एक आधिकारिक लिंक भी साझा किया गया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस राज्य और स्थानीय चुनावों से पहले चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठा रही है। हालांकि, आयोग ने अपने स्पष्टीकरण से यह साफ कर दिया है कि पंचायत चुनावों में किसी भी गड़बड़ी या कार्रवाई की जिम्मेदारी राज्य चुनाव आयोग की है।

