विज्ञान से जन-जन तक: उत्तराखण्ड में नवाचार का नया अध्याय

विज्ञान से जन-जन तक: उत्तराखण्ड में नवाचार का नया अध्याय

हमारी पंचायत, देहरादून

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड अब केवल प्राकृतिक सौंदर्य की पहचान नहीं, बल्कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उभरते केंद्र के रूप में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है। राज्य सरकार का उद्देश्य विज्ञान को प्रयोगशालाओं की चारदीवारी से निकालकर जनता की भागीदारी वाला जनआंदोलन बनाना है, और इस दिशा में उठाए गए कदम अब जमीन पर असर दिखाने लगे हैं।

उत्तराखण्ड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत के अनुसार, राज्य में पहली बार शुरू की गई कई अभिनव योजनाओं ने विज्ञान को सरल, रोचक और सुलभ बनाते हुए युवाओं, छात्रों और शोधार्थियों को नई दिशा दी है। इन पहलों ने यह संदेश दिया है कि विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि भविष्य गढ़ने का औजार है।

राज्य को मिली विज्ञान रेडियो 88.8 मेगाहर्ट्ज की स्वीकृति इस दिशा में एक अनूठा प्रयोग है। यह रेडियो विज्ञान को आम भाषा में, रोजमर्रा के जीवन से जोड़ते हुए हर घर तक पहुँचाने का माध्यम बनेगा। पहाड़ से मैदान तक, विज्ञान की आवाज अब रेडियो तरंगों पर सुनी जाएगी।

महिलाओं और छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए शुरू किया गया ‘She for STEM’ कार्यक्रम भी ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। इस कार्यक्रम के जरिए हजारों छात्राओं को विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्रों में करियर निर्माण के लिए प्रेरणा, मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिल रहा है। यह पहल विज्ञान में लैंगिक संतुलन की दिशा में मजबूत कदम है।

दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई ‘Labs on Wheels’ मोबाइल विज्ञान प्रयोगशालाएँ विज्ञान शिक्षा की तस्वीर बदल रही हैं। राज्य के सभी 13 जनपदों में संचालित ये प्रयोगशालाएँ उन स्कूलों तक विज्ञान पहुँचा रही हैं, जहाँ आधुनिक संसाधनों की कमी अब तक एक बड़ी चुनौती थी।

नवाचार और शोध को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य में 60 पेटेंट सूचना केंद्रों की स्थापना की गई है। ये केंद्र न केवल शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को पेटेंट प्रक्रिया की जानकारी दे रहे हैं, बल्कि स्टार्टअप संस्कृति और इनोवेशन इकोसिस्टम को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

इसके साथ ही पहली बार साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग का आयोजन पूरे राज्य में किया जा रहा है। जनपदों और ब्लॉकों तक फैली यह प्रतियोगिता छात्रों में वैज्ञानिक सोच, प्रतिस्पर्धा और रचनात्मकता को बढ़ावा दे रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि उत्तराखण्ड में विज्ञान और नवाचार को जनआंदोलन बनाने का संकल्प अब साकार होता दिख रहा है। ये सभी पहलें विकसित उत्तराखण्ड @2027 और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को नई ऊर्जा दे रही हैं। सरकार का प्रयास है कि विज्ञान की रोशनी हर गाँव, हर स्कूल और हर घर तक पहुँचे, ताकि आने वाले समय में उत्तराखण्ड विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में देश के लिए एक प्रेरक मॉडल बन सके।

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