पहाड़ी और मैदानी दोनों इलाकों में ठंड बढ़ी, बर्फबारी व बारिश की संभावना, शीतलहर और कोहरे की चेतावनी
हमारी पंचायत, देहरादून
उत्तराखंड में दिसंबर की शुरुआत के साथ ही सर्दी ने पूरी तरह दस्तक दे दी है। रात के समय कड़ाके की ठंड अब पहाड़ से लेकर मैदानी जिलों तक महसूस की जा रही है। न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट और दिन – रात के तापमान में बढ़ता अंतर प्रदेश में ठिठुरन को और अधिक बढ़ा रहा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आगामी दिनों में पहाड़ों पर बर्फबारी और कई इलाकों में हल्की बारिश का दौर सर्दी को और तीखा कर सकता है।
प्रदेश में इन दिनों मौसम शुष्क बना हुआ है, लेकिन जैसे ही पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, पूरा मौसम का मिजाज बदल सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बीते दो महीनों से प्रदेश में बारिश न होने से सूखी ठंड बढ़ गई है। हवा में नमी की कमी के कारण रात का तापमान अचानक गिर रहा है, जबकि दिन में धूप के चलते तापमान सामान्य या उससे थोड़ा ऊपर बना हुआ है।
यह तापमान का अंतर लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। दिसंबर के शुरू में प्रदेश भर में आसमान साफ रहने का अनुमान लगाया गया था। देहरादून सहित कई मैदानी जिलों में दिन भर धूप खिली रहेगी, लेकिन जैसे ही रात ढलेगी तापमान तेजी से नीचे जाएगा। मौसम विभाग के अनुसार देहरादून में अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया जा सकता है।
सोमवार को भी राजधानी का अधिकतम तापमान 1 डिग्री बढ़कर 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। स्पष्ट है कि न्यूनतम तापमान लगातार नीचे जा रहा है और यह संकेत है कि आने वाले दिनों में ठंड और कड़ी हो सकती है। 4 दिसंबर से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना जताई गई है, जिसके कारण उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है।
बर्फबारी शुरू होते ही तापमान में और गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे ठंड का असर पूरे प्रदेश में बढ़ेगा। मौसम विभाग ने 7 दिसंबर तक प्रदेश के मौसम में बदलाव की आशंका जताई है। इस दौरान शीतलहर और घने कोहरे की स्थिति भी बन सकती है, खासकर मैदानी जिलों में। लगातार गिरते तापमान और बढ़ती ठंड को देखते हुए नगर निगम और प्रशासन ने भी तैयारी तेज कर दी है।
कई स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है, वहीं बेघर और जरूरतमंद लोगों के लिए रैन बसेरों को दुरुस्त कर दिया गया है। नगर निगम ने साफ कहा है कि जैसे-जैसे ठंड बढ़ेगी, अलाव की व्यवस्था और मजबूत की जाएगी। पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने, गर्म कपड़ों का उपयोग बढ़ाने और सुबह–शाम विशेष सावधानी बरतने की सलाह जारी की है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी चेतावनी दी है कि सूखी ठंड बच्चों, बुजुर्गों और हृदय तथा सांस संबंधी बीमारियों से ग्रसित लोगों के लिए अधिक खतरनाक साबित हो सकती है। तापमान में तेजी से गिरावट और हवा में नमी की कमी के कारण संक्रमण बढ़ने की संभावना रहती है। डॉक्टर लोगों को सुबह की कड़ाके की ठंड में टहलने से बचने, संतुलित आहार लेने, हाइड्रेशन बनाए रखने और शरीर को ढककर रखने की सलाह दे रहे हैं।
दिसंबर के आरंभ में ही इतनी सर्दी महसूस होना इस बात का संकेत है कि इस बार ठंड का प्रभाव अधिक लंबा और कड़ा हो सकता है। पहाड़ों पर संभावित बर्फबारी न केवल तापमान में भारी गिरावट लाएगी, बल्कि मैदानी क्षेत्रों में भी इसकी सीधी असर दिखाई देगा। ऐसे में राज्य के सभी इलाकों में ठंड का यह कहर आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।

