भारत की भूमि से प्रारंभ हुए कैलाश पर्वत के पवित्र दर्शन

भारत की भूमि से प्रारंभ हुए कैलाश पर्वत के पवित्र दर्शन

नवरात्रि के पहले दिन यात्रियों ने 18 हजार फीट की ऊंचाई वाले लिपुलेख शिखर से किए दर्शन, ऊँ पर्वत के भी होंगे दर्शन
श्रृद्धालुओं को अब चीन के व्यवसाय वाले तिब्बत जाने की नहीं है जरूरत

हमारी पंचायत, देहरादून

भारत की भूमि से ही पवित्र कैलाश पर्वत के दर्शन का शिव भक्तों का स्वप्न पूरा हो गया है। नवरात्रि के पहले दिन यात्रियों के पाँचवाँ रथ यात्रा स्थल पर स्थित पुराने लिपुलेख से कैलाश पर्वत के दर्शन किये। कैलाश पर्वत के दिव्य दर्शन से श्रृद्धालु भाव विभोर हो उठो।

केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलने वाली पार्टी के बाद पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने कमर कसने के लिए सफल ऑपरेशन की यात्रा की थी। कुमाऊं मंडल विकास निगम ने इसके लिए एक टूर पैकेज घोषित किया है।

उत्तराखंड विकास परिषद की ओर से सबसे पहले कुमाऊं मंडल विकास निगम ने मांटाऊ कैलास के दर्शन के लिए 5 दिव्य टूर पैकेज बनाया है। इस पैकेज में भगवान शिव के दो अन्य धाम आदि कैलाश एवं ऊं पर्वत के दर्शन भी शामिल हैं।

पैकेज के तहत यात्रियों के पहले 5 रथ ग्रुप ने आज गुरुवार को कैलाश के दर्शन किये। यात्रियों के समूह को बुधवार को हैलीकॉप्टर के माध्यम से ऑर्केस्ट्रा के इकोनोमिक स्थान पर रवाना किया गया। सभी यात्रियों को सड़क मार्ग से पुराने लिपुलेख से ॐ पर्वत और माउंट कैलास के दर्शन कराए गए।

अब इन सभी यात्रियों को जौलीकांग से आदि कैलाश के दर्शन करवाकर होली में रात्रि विश्राम कराया जाएगा। इसके बाद सभी यात्री हैलीकॉप्टर के माध्यम से पठानकोट वापस आ जाएंगे।

इस यात्रा दर्शन कार्यक्रम में नीरज मनोहर लाल चौकसे, छात्र मोहिनी नीरज चौकसे, अमनदीप कुमार जिंदल, केवल कृष्ण, नरेंद्र कुमार शामिल हैं। इस यात्रा में दर्शन को आए मासूम चौकसे ने बताया कि भगवान शिव के इन पवित्र धामों के दर्शन से अत्यंत सुख की अनुभूति होती है। माउंट कैलाश, आदि कैलाश एवं ऊं पर्वत की अलौकिक सुंदरता के दर्शन ने मंत्रमुग्ध कर दिया है।

वहीं अन्य मासूम जिंदल ने बताया कि भगवान शिव के इन धामों के दर्शन कर उन्हें मानो स्वर्ग की प्राप्ति होती है। प्रकृति के इस विहंगम दृश्य को देखते ही मन को अलग ही सुख की प्राप्ति हो रही है। उन्होंने इस यात्रा को संचालित करने के लिए सरकार की प्रति शेयरधारिता प्रदर्शित की है।

कोरोना काल से पहले तक केंद्र सरकार कुमाऊं मंडल विकास निगम के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा कराती थी। तब शिव भक्त लिपुपास से पैदल यात्रा कर चीन बार्डर पार कर कैलाश मानसरोवर के दर्शन यात्रा करते थे। कोरोना काल के बाद यह यात्रा बंद हो गई है।

वहीं दूसरी ओर भारत चीन विवाद के कारण अभी तक चीन सरकार ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए भारत सरकार से अपनी सहमति नहीं दी है। बहुत समय से शिव भक्त कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने आये थे। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने भारत की भूमि से ही पवित्र कैलाश पर्वत के दर्शन का निर्णय लिया।

“भारत की भूमि से शिवभक्तों को कैलाश पर्वत के दर्शन बहुत ही सुखद लगते हैं। मैं इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति चाहता हूं। हमारी सरकार सीमांत में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय निवासियों के प्रवास की समस्या पर रोक की दिशा पर काम कर रही है। भविष्य में इस यात्रा में और भी अधिक सहज निर्माण के लिए सुविधाएं विकसित की जाएंगी।” -पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

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