घानी से बदली तस्वीर, कालसी की महिलाओं ने रचा सफलता का मॉडल

घानी से बदली तस्वीर, कालसी की महिलाओं ने रचा सफलता का मॉडल

घानी से बदली तस्वीर, कालसी की महिलाओं ने रचा सफलता का मॉडल

‘हिलान्स’ सरसों तेल ब्रांड से बढ़ी पहचान, 764 महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर
हमारी पंचायत, देहरादून

देहरादून जिले के कालसी विकासखंड का हरीपुर गांव आज ग्रामीण महिला उद्यमिता की एक प्रेरक मिसाल बनकर उभरा है। यहां महिलाओं ने सामूहिक प्रयासों से न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि स्थानीय उत्पादों को बाजार में नई पहचान भी दिलाई है। विकास महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन द्वारा संचालित सरसों तेल यूनिट महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही है।

ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (रीप) के अंतर्गत सितंबर 2024 में स्थापित इस यूनिट ने कम समय में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। करीब 10 लाख रुपये की लागत से शुरू की गई इस पहल में परियोजना सहायता, बैंक ऋण और महिलाओं के स्वयं के योगदान को शामिल किया गया। आज यह यूनिट स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन चुकी है।

यूनिट में लकड़ी की घानी और आधुनिक मशीनों के माध्यम से कोल्ड प्रेस्ड तथा हॉट प्रेस्ड सरसों तेल तैयार किया जाता है। गुणवत्ता और शुद्धता के कारण यह तेल कालसी और विकासनगर से लेकर देहरादून तक अपनी पहचान बना चुका है। महिलाओं द्वारा तैयार किया जा रहा उत्पाद ‘हिलान्स’ ब्रांड के नाम से बाजार में उपलब्ध है, जिसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

विकास महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत 14 ग्राम संगठन, 120 स्वयं सहायता समूह और 764 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। उत्पादन, पैकेजिंग, विपणन और प्रबंधन की जिम्मेदारी महिलाएं स्वयं संभाल रही हैं। इससे उन्हें आर्थिक लाभ के साथ-साथ नेतृत्व और प्रबंधन का अनुभव भी मिल रहा है।

यूनिट से प्रतिमाह लगभग 70 हजार रुपये की आय अर्जित हो रही है। स्थापना के बाद से अब तक 24 लाख रुपये से अधिक मूल्य का सरसों तेल बेचा जा चुका है। इसके अलावा चार से पांच महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है। सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि “हाउस ऑफ हिमालय” ने यहां से 1700 लीटर सरसों तेल खरीदा, जिससे महिलाओं को पांच लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई। वहीं आईआईटी रुड़की को भी नियमित रूप से तेल की आपूर्ति की जा रही है।

तेल उत्पादन के दौरान निकलने वाली सरसों की खल भी अतिरिक्त आय का माध्यम बनी है। इसे किसानों और पशुपालकों को बेचकर फेडरेशन अपनी आमदनी बढ़ा रहा है। ऑनलाइन बिक्री और डिजिटल माध्यमों से प्रचार ने भी कारोबार को नई गति दी है।

यह पहल साबित करती है कि यदि महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और संसाधन मिलें तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास की नई इबारत भी लिख सकती हैं। कालसी की यह सफलता आज ग्रामीण आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण बन चुकी है।

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