पंचायतों-शहरी निकायों को ट्रांसफर होगी टैक्स कलेक्शन
हिमाचल सरकार ने छठे राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें स्वीकारीं
बजट आबंटन का फार्मूला मंजूर, 20 फ़ीसदी ग्रांट अच्छे काम पर मिलेगी
हमारी पंचायत, शिमला
हिमाचल सरकार ने छठे राज्य वित्त आयोग की रिपोर्ट में राज्य की पंचायत और शहरी निकायों के लिए दी गई रेकमेंडेशन को स्वीकार कर लिया है। इस बारे में शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार ने अधिसूचना जारी कर दी है।
अब पंचायत और शहरी निकायों में टैक्स लगाने का अधिकार दिया जाएगा और इसके कलेक्शन की जिम्मेदारी भी होगी। वित्त आयोग ने यह सुझाव दिया है कि पंचायत और शहरी निकायों की वित्तीय स्थिति को ठीक करने के लिए इन्हें बाकी विभागों का टैक्स कलेक्शन का काम भी दिया जाना चाहिए।

ग्राम पंचायत को अपने क्षेत्र में टैक्स, फीस इत्यादि लगाने का अधिकार होगा और इसके कलेक्शन का भी। गौर हो कि छठे राज्य वित्त आयोग ने अक्तूबर, 2022 में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी।
इस रिपोर्ट में सिफारिश की गई थी कि शहरी निकायों को सरकार से मिलने वाली ग्रांट 80 फीसदी बेसिक और 20 फ़ीसदी परफॉर्मेंस के आधार पर मिलेगी। शहरी निकायों में वार्षिक जरूरत के आधार पर और स्टाफ की तैनाती के अनुसार फंड्स की एलोकेशन हो सकती है।
20 फ़ीसदी परफॉर्मेंस ग्रांट शहरी निकाय द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स की कलेक्शन के आधार पर दी जाएगी और शहरी निकाय के खातों की ऑनलाइन मैनेजमेंट को भी इसमें देखा जाएगा। राज्य सरकार ने शहरी निकायों में छठे राज्य वित्त आयोग के डेवोल्यूशन फार्मूला को भी स्वीकार कर लिया है।
छठे राज्य वित्त आयोग ने पंचायत और शहरी निकायों की आय में सुधार के लिए जो सुझाव दिए थे, उन्हें भी स्वीकार कर लिया गया है। इसके अलावा वित्त आयोग ने सिफारिश की है कि इरिगेशन और पेयजल की योजनाओं को पंचायत के हवाले किया जा सकता है।
यह भी सिफारिश की गई है कि पंचायत एरिया में आने वाले शैक्षणिक संस्थाओं के बिल्डिंग फंड और वेलफेयर फंड का इस्तेमाल भी पंचायत के साथ मिलकर किया जाए।
इसी तरह शहरी निकायों के लिए प्रॉपर्टी टैक्स के अलावा पेयजल सप्लाई और सीवरेज पर टैरिफ लगाने का अधिकार देने का सुझाव भी है। इन सभी सिफारिशों को राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया है। अब इन्हें लागू करने के लिए अलग से फैसले लेने होंगे।

