निर्विरोध जीत पर बढ़ा इनाम
पंचायत, बीडीसी और जिला परिषद को करोड़ों तक प्रोत्साहन, सहमति से चुनाव कराने की अपील
हमारी पंचायत, शिमला
हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायती राज चुनावों से पहले राज्य सरकार ने बड़ा और अहम फैसला लिया है। सरकार ने निर्विरोध चुनी जाने वाली पंचायतों, ब्लॉक विकास समिति (बीडीसी) और जिला परिषदों के लिए प्रोत्साहन राशि में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस कदम का उद्देश्य चुनावी खर्च को कम करना और विकास कार्यों को गति देना है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने लोगों से अपील की है कि वे आपसी सहमति से अपने प्रतिनिधियों का चयन करें। उनका कहना है कि इससे न केवल चुनावों पर होने वाला भारी खर्च बचेगा, बल्कि गांवों में आपसी भाईचारा और सहयोग की भावना भी मजबूत होगी। मंत्री के अनुसार, पंचायत चुनावों में करीब 80 करोड़ रुपये तक खर्च हो जाता है और इसमें बड़ी प्रशासनिक मशीनरी भी लगती है।
नई व्यवस्था के तहत अब यदि कोई पंचायत निर्विरोध चुनी जाती है, तो उसे 25 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। इसी तरह बीडीसी को 50 लाख रुपये और जिला परिषद को 1 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इससे पहले यह राशि क्रमशः 10 लाख, 20 लाख और 30 लाख रुपये थी। यानी सरकार ने प्रोत्साहन राशि में दोगुने से अधिक की बढ़ोतरी की है।
मंत्री ने बताया कि पिछली बार 104 पंचायतें निर्विरोध चुनी गई थीं और इस बार इससे भी अधिक संख्या की उम्मीद जताई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि लोग आपसी सहमति से प्रतिनिधियों का चयन करते हैं, तो मिलने वाली यह अतिरिक्त राशि सीधे गांव के विकास कार्यों—जैसे सड़क, पानी, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं—पर खर्च की जा सकेगी।
राजनीतिक पहलू पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी आगामी चुनावों के लिए पूरी तरह तैयार है। नगर परिषद और नगर निगम चुनावों की घोषणा हो चुकी है और जल्द ही पंचायती राज चुनावों का शेड्यूल भी जारी होने की संभावना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में पंचायत चुनाव पार्टी चिन्ह पर नहीं होते।
महिला आरक्षण बिल को लेकर मंत्री ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा चुनावों के समय नए मुद्दे उठाकर लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश करती है। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस महिला आरक्षण के पक्ष में है और इसका समर्थन करती है।
कुल मिलाकर, सरकार की यह पहल सहमति आधारित चुनावों को बढ़ावा देने और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो पंचायत स्तर पर विकास की रफ्तार तेज होने के साथ-साथ सामाजिक समरसता भी मजबूत हो सकती है।


I love it when people come together and share opinions, great blog, keep it up.