सब-हेडिंग: रेलवे टनल के पास पहाड़ी दरकी, मंदिर क्षतिग्रस्त; ट्रैक पर पहुंचा मलबा
हमारी पंचायत, हरिद्वार/श्रीनगर:
हरिद्वार में रेलवे टनल के पास पहाड़ी के नीचे स्थित प्राचीन काली मंदिर पर बीती देर रात अचानक पहाड़ी से मलबा और भारी बोल्डर गिर गया. रात करीब ढाई बजे हुई इस घटना में मंदिर की गुंबद और दीवारों को नुकसान पहुंचा है. गनीमत रही कि घटना के समय मंदिर परिसर में कोई मौजूद नहीं था, जिससे जनहानि होने से बच गई. वहीं, सूचना मिलने पर रेलवे के अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत बचाव का कार्य शुरू किया. रात को ही रेलवे ट्रैक से मलबा और पत्थर हटा दिए गए. जिससे यात्रायत सुचारू हो गई.
दरअसल, हरिद्वार में पिछले दो दिनों से भारी बारिश हो रही थी. हालांकि, बीती रात को बारिश तो नहीं हुई, लेकिन पहाड़ की मिट्टी गीली थी. रात करीब ढाई बजे रेलवे टनल के पास काली मंदिर पर पहाड़ी से अचानक मलबा और बड़े पत्थर नीचे की ओर आ गिरे. मंदिर पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में स्थित है. जबकि, इसके ठीक नीचे रेलवे ट्रैक गुजर रहा है. भारी बोल्डर गिरने से मंदिर का गुंबद और दीवारों समेत कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए. घटना के बाद आसपास के क्षेत्र में अफरा तफरी का माहौल बन गया.
वहीं, सूचना मिलते ही रेलवे एवं आपदा प्रबंधन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. अधिकारियों ने ये भी देखा कि पहाड़ी से गिरा मलबा रेलवे ट्रैक तक तो नहीं पहुंचा है और रेल यातायात के लिए किसी तरह का खतरा तो नहीं है. रेलवे कर्मचारियों ने तत्काल ट्रैक का निरीक्षण किया और जहां मलबा गिरा था, उसे हटाने की कार्रवाई की.

रेलवे ट्रैक पर आया मलबा
पिछले साल भी हुआ था भूस्खलन: काली मंदिर के ऊपर से भारी बोल्डर गिरने की घटना ने पहाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. एक साल पहले भी यहां बड़ा भूस्खलन हुआ था. जिसकी वजह से कई ट्रेनें लेट हो गई थी और रेलवे ट्रैक को सुचारू करने में घंटों का समय लग गया था. उसके बाद बजट खर्च करके पहाड़ी का ट्रीटमेंट किया गया.
रेलवे ट्रैक और पहाड़ी के बीच बनाए गए लोहे के जाल की मरमत की गई. लगातार बारिश के दौरान पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने की आशंका बढ़ जाती है. ऐसे में रेलवे ट्रैक के साथ ही नीचे सड़क और दुकानों की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है. हैरानी की बात ये है कि स्थायी समाधान की जगह सिर्फ मरम्मत का काम ही जाता है.

काली मंदिर के ऊपर भूस्खलन
“रात के समय रेलवे ट्रैक पर थोड़ा मलबा गिरा था. सूचना मिलने के बाद रेलवे कर्मचारियों ने रात में ही मलबे को ट्रैक से हटा दिया था. मलबा हटाए जाने के बाद रेल यातायात पूरी तरह सामान्य रहा. किसी ट्रेन का संचालन प्रभावित नहीं हुआ और सभी ट्रेनें अपने निर्धारित समय पर चल रही हैं.“- बीके मालिक, स्टेशन मास्टर, हरिद्वार
श्रीनगर में अलकनंदा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे, प्रशासन अब भी अलर्ट: पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते श्रीनगर से होकर बहने वाली अलकनंदा नदी का जलस्तर बीते दिन खतरे के निशान तक पहुंच गया था. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल अलर्ट जारी कर नदी किनारे रहने वाले लोगों और आम नागरिकों से नदी के आसपास न जाने की अपील की थी. साथ ही एसडीआरएफ और जिला आपदा प्रबंधन की टीमों को भी पूरी तरह सतर्क रखा गया था.

श्रीनगर में अलकनंदा नदी का जलस्तर
शुक्रवार यानी 7 अगस्त को अलकनंदा नदी के जलस्तर में राहत देखने को मिली है. आज नदी का जलस्तर 534.20 मीटर दर्ज किया गया. जबकि, इसका अलार्म लेवल 535 मीटर और डेंजर लेवल 536 मीटर है. फिलहाल, जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरत रहा है.
“बीते दिन भारी बारिश के कारण नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा था और खतरे के स्तर तक पहुंच गया था. इसे देखते हुए एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन की टीमों को पहले से ही अलर्ट मोड पर रखा गया था. लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार लोगों को नदी किनारे न जाने की चेतावनी दी गई और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी गई.“- स्वाति एस भदौरिया, जिलाधिकारी, पौड़ी

