पीपलकोटी टनल में मौत का मलबा

पीपलकोटी टनल में मौत का मलबा

सात मजदूरों की मौत, तीन फंसे; हादसे की जांच के आदेश, परिजनों को चार लाख

हमारी पंचायत, चमोली

पीपलकोटी में निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की टनल में गुरुवार शाम अचानक पानी और मलबा आने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे के समय टनल के भीतर काम कर रहे 22 मजदूर इसकी चपेट में आ गए। शुक्रवार तक सात मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 12 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। इनमें 11 घायल मजदूरों का अस्पताल में उपचार चल रहा है और एक को मामूली चोट के बाद छुट्टी दे दी गई। टनल के अंदर फंसे तीन मजदूरों को निकालने के लिए रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है।

डेढ़ किलोमीटर अंदर आया पानी-मलबा

हादसा गुरुवार 13 अगस्त की शाम करीब 7:05 बजे हुआ। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार विष्णुगाड परियोजना की टीआरटी यानी टेल रेस टनल में करीब 1.5 किलोमीटर अंदर अचानक पानी और मलबा आया। कुछ ही देर में पानी और मलबे ने टनल के भीतर काम कर रहे मजदूरों को अपनी चपेट में ले लिया।

सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, जिला प्रशासन और अन्य रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंचीं। रात से ही सुरंग में बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। टनल के भीतर मलबा और पानी होने के कारण रेस्क्यू टीमों को काफी सावधानी के साथ आगे बढ़ना पड़ रहा है।

सात मजदूरों ने गंवाई जान

हादसे में अब तक सात मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं। मृतकों में उत्तर प्रदेश के तीन, उत्तराखंड के दो और छत्तीसगढ़ के दो मजदूर शामिल बताए गए हैं। हादसे में घायल 11 मजदूरों का अस्पताल में उपचार चल रहा है, जबकि एक मजदूर को मामूली चोट के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

टनल में फंसे मजदूरों में छत्तीसगढ़ के दो और झारखंड का एक मजदूर बताया गया है। प्रशासन और रेस्क्यू एजेंसियां लगातार उनकी लोकेशन तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश कर रही हैं।

कैविटी बनी हादसे की वजह?

प्रारंभिक जांच में टनल के भीतर किसी स्थान पर कैविटी बनने की आशंका जताई जा रही है। माना जा रहा है कि भूमिगत खाली स्थान में जमा पानी और मलबा अचानक टनल में पहुंचा होगा। हालांकि अधिकारियों ने इसे अभी हादसे की अंतिम वजह नहीं माना है।

आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार टनल में पानी और मलबा आने की वास्तविक वजह का पता विस्तृत जांच के बाद ही चलेगा। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम से तकनीकी और भूगर्भीय जांच कराई जाएगी।

सरकार ने दिए जांच के आदेश

आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने घटना की जानकारी लेने के बाद हादसे की जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता टनल में फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके बाद हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, पानी और मलबा अचानक कहां से आया और सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी रही या नहीं, इसकी जांच की जाएगी।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी डीआईजी राजकुमार नेगी के अनुसार घटना के बाद आपदा प्रबंधन का इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (आईआरएस) तत्काल सक्रिय कर दिया गया। मुख्यमंत्री और आपदा प्रबंधन सचिव ने भी घटना की जानकारी लेकर रेस्क्यू अभियान की निगरानी की।

मृतकों के परिजनों को चार लाख

सरकार ने हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों को आपदा नियमों के तहत चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। घायलों के उपचार और नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है।

444 मेगावाट की परियोजना

पीपलकोटी में बन रही विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना 444 मेगावाट क्षमता की है। टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड की इस परियोजना में चार इकाइयां हैं और प्रत्येक इकाई की क्षमता 111 मेगावाट है। परियोजना अलकनंदा नदी पर विकसित की जा रही है।

परियोजना में करीब 13.4 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल और लगभग 3.07 किलोमीटर लंबी टेल रेस टनल का निर्माण शामिल है। हादसा इसी टेल रेस टनल में हुआ है।

परियोजना से सालाना करीब 1,657 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। टीएचडीसी के अनुसार परियोजना की पहली यूनिट को दिसंबर 2027 और अंतिम यूनिट को जून 2028 तक शुरू करने का लक्ष्य है।

पहले भी परखी जा चुकी है सुरक्षा व्यवस्था

इसी परियोजना में जुलाई 2025 में टनल में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल भी की गई थी। इसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सीआईएसएफ, जिला पुलिस और परियोजना से जुड़े कर्मचारियों ने हिस्सा लिया था। मॉक ड्रिल का उद्देश्य टनल में अचानक पानी आने की स्थिति में बचाव व्यवस्था और अर्ली फ्लड वार्निंग सिस्टम की तैयारियों को परखना था।

अब ताजा हादसे के बाद जांच में यह भी देखा जाएगा कि टनल की भूगर्भीय स्थिति, पानी के संभावित स्रोत, निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल कितने प्रभावी थे। फिलहाल रेस्क्यू टीमें टनल में फंसे तीन मजदूरों को बाहर निकालने के अभियान में जुटी हैं।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *