पौड़ी के थलीसैंण में पीठ पर बच्चा बांधकर नदी पार करती दिखी महिला, 400 परिवारों की बढ़ी मुश्किलें
हमारी पंचायत, पौड़ी
उत्तराखंड में विकास के दावों के बीच पहाड़ों की जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आई है। पौड़ी जिले के थलीसैंण क्षेत्र में एक महिला अपनी पीठ पर बच्चे को बांधकर नदी पार करती दिखाई दी। यह तस्वीर डोरिया और कैन्यूर गांव के बीच स्थित सगुड़ी पुल की बदहाली की है, जो वर्ष 2016 में टूट गया था। करीब दस साल बीतने के बावजूद पुल का पुनर्निर्माण नहीं हो पाया है। नतीजतन, क्षेत्र के करीब 400 परिवार आज भी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं।
पांच किलोमीटर अतिरिक्त दूरी से बचने को जोखिम भरा सफर
सगुड़ी पुल टूटने के कारण ग्रामीणों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए करीब पांच किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। इसी परेशानी से बचने के लिए लोग टूटे पुल के अवशेषों के सहारे नदी पार कर रहे हैं। बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है। सामने आए वीडियो में एक महिला बच्चे को पीठ पर बांधकर नदी पार करती दिखाई दे रही है। जरा-सा संतुलन बिगड़ने पर बड़ा हादसा हो सकता है।
स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी
पुल नहीं होने का सबसे ज्यादा असर विद्यार्थियों और रोजमर्रा के काम से बाजार आने-जाने वाले लोगों पर पड़ रहा है। राजकीय इंटर कॉलेज थलीसैंण और डिग्री कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल का निर्माण हो जाता तो आवागमन सुरक्षित और आसान हो सकता था।
कई बार उठी मांग, अब तक नहीं हुआ निर्माण
ग्रामीण विक्रम सिंह, विजय सिंह और अमर सिंह का कहना है कि वर्ष 2016 में पुल टूटने के बाद से ही इसके पुनर्निर्माण की मांग उठाई जा रही है। स्थानीय प्रशासन की ओर से डीपीआर तैयार कर पुल निर्माण कराने का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन अब तक स्थिति नहीं बदली।
कांग्रेस के थलीसैंण ब्लॉक अध्यक्ष विजय बिष्ट ने बताया कि पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार शासन-प्रशासन के समक्ष मामला उठाया गया और आंदोलन भी किए गए। इसके बावजूद ग्रामीणों को राहत नहीं मिली। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों के हित में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
वहीं, पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राजकुमार ने पुल का निर्माण नहीं होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उनका कहना है कि राज्य गठन के बाद भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। एक महत्वपूर्ण पुल का दस साल तक पुनर्निर्माण नहीं होना क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी परेशानी है।
आश्वासन नहीं, अब निर्माण का इंतजार
सगुड़ी पुल की बदहाल स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। करीब एक दशक से पुल का इंतजार कर रहे 400 परिवारों को अब आश्वासन नहीं, बल्कि निर्माण कार्य शुरू होने का इंतजार है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे से पहले इस समस्या का समाधान करेगा?

