चमोली के चाई गांव के पास हुआ हादसा, पायलट समेत छह लोग सवार, 2025 के पांच हादसों और 13 मौतों के बाद फिर सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
हमारी पंचायत, देहरादून
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के समापन से पहले बदरीनाथ धाम से लौट रहे एक हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से हवाई सेवाओं की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र में चाई गांव के पास हुए इस हादसे के समय हेलीकॉप्टर में पायलट समेत छह लोग सवार थे। घटना की सूचना सेना की यूनिट की ओर से चमोली के जिलाधिकारी को दी गई। हादसे के बाद पायलट से संपर्क नहीं हो सका। शुरुआती जानकारी में खराब मौसम को दुर्घटना की संभावित वजह बताया जा रहा है।
इस घटना ने सबसे बड़ा सवाल मौसम विभाग की चेतावनी और हेलीकॉप्टर संचालन के बीच तालमेल को लेकर खड़ा किया है। जब मौसम विभाग ने बारिश, गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज हवाओं की आशंका जताई थी, तब हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति कैसे मिली? क्या उड़ान से पहले मौसम की वास्तविक स्थिति का आकलन किया गया था? क्या संबंधित ऑपरेटर और पायलट को मौसम संबंधी चेतावनियों की जानकारी थी? इन सवालों का जवाब अब जांच के बाद ही मिल सकेगा।
मौसम विभाग के अलर्ट के बावजूद उड़ान पर सवाल
भारत मौसम विज्ञान विभाग के चमोली के लिए जारी पूर्वानुमान के अनुसार 30 अक्टूबर को आसमान सामान्यतः बादलों से घिरा रहने और एक-दो दौर में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना थी। इससे पहले 29 अक्टूबर को जारी चेतावनी में 30 अक्टूबर के लिए आकाशीय बिजली, गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका भी जताई गई थी।
पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदलता है। विशेषकर ऊंचाई वाले इलाकों और संकरी घाटियों में बादलों, कम दृश्यता, तेज हवाओं और बारिश के कारण हेलीकॉप्टर संचालन जोखिमपूर्ण हो सकता है। ऐसे में मौसम विभाग के पूर्वानुमान के साथ उड़ान से ठीक पहले और उड़ान के दौरान मौसम की वास्तविक स्थिति की निगरानी भी बेहद जरूरी है। जानकारी के अनुसार मौसम के चलते कई हेली सेवाएं बंद थीं। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर को किन परिस्थितियों में उड़ान की अनुमति मिली।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी हादसे की वजह
हादसे को लेकर आपदा सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि घटना अभी हुई है और जांच के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकता है। फिलहाल दुर्घटना के वास्तविक कारणों को लेकर आधिकारिक जांच का इंतजार है। जांच में मौसम की स्थिति, उड़ान की अनुमति, पायलट के निर्णय, हेलीकॉप्टर की तकनीकी स्थिति और संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
2025 में पांच हादसे, 13 लोगों की गई थी जान
उत्तराखंड में वर्ष 2025 का चारधाम यात्रा सीजन हेलीकॉप्टर सुरक्षा के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा था। उस दौरान कई दुर्घटनाएं और आपातकालीन लैंडिंग की घटनाएं सामने आईं। 21 जुलाई 2025 को नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से दिए गए जवाब के अनुसार जून 2025 तक चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर से जुड़ी चार दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं। पूरे यात्रा सीजन में सामने आई पांच प्रमुख घटनाओं में 13 लोगों की जान गई थी।
8 मई 2025 को उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री मार्ग पर गंगनानी के पास एयरो ट्रांस सर्विस का बेल-407 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। खरसाली से झाला जा रहे इस हेलीकॉप्टर में पायलट समेत छह लोगों की मौत हुई थी, जबकि एक यात्री घायल हुआ था। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार हेलीकॉप्टर का मुख्य रोटर सड़क के ऊपर से गुजर रही फाइबर केबल से टकरा गया था।
12 मई को बदरीनाथ से लौट रहे एक हेलीकॉप्टर को खराब दृश्यता के कारण रुद्रप्रयाग जिले के उखीमठ क्षेत्र में एक स्कूल के मैदान में आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी थी। इस घटना में सभी यात्री सुरक्षित रहे थे।
17 मई को केदारनाथ में मरीज के रेस्क्यू के लिए पहुंचे पिनेकल एयर के एयरबस एएस-350 हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान दुर्घटना हुई। हेलीकॉप्टर का टेल बूम क्षतिग्रस्त होकर अलग हो गया था। हालांकि इसमें किसी की जान नहीं गई।
7 जून को सिरसी से केदारनाथ के लिए उड़ान भर रहे क्रिस्टल एविएशन के हेलीकॉप्टर में तकनीकी समस्या आने के बाद पायलट ने उसे मुख्य सड़क पर उतार दिया था। इस घटना में पायलट घायल हुआ और हेलीकॉप्टर का पिछला रोटर क्षतिग्रस्त हो गया था।
इसके बाद 15 जून को केदारनाथ से गुप्तकाशी लौट रहा आर्यन एविएशन का बेल-407 हेलीकॉप्टर गौरीकुंड के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में पायलट समेत सात लोगों की मौत हुई थी। हेलीकॉप्टर में एक बच्चा भी सवार था।
हादसों के बाद सुरक्षा के लिए उठाए गए थे कदम
15 जून की दुर्घटना के बाद राज्य और केंद्र सरकार ने चारधाम क्षेत्र में हेलीकॉप्टर सेवाओं के संचालन को लेकर कई कदम उठाए थे। हेलीकॉप्टर सेवाएं अस्थायी रूप से रोकी गई थीं। डीजीसीए और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण को ऑपरेटरों तथा पायलटों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए थे। खराब मौसम में उड़ान संचालन पर सख्ती, पायलटों के अनुभव की जांच और मौसम की वास्तविक जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया था।
वर्ष 2026 के यात्रा सीजन के पहले चरण में हेलीकॉप्टर सेवाओं का हादसों से मुक्त रहना सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से सकारात्मक माना जा रहा था। लेकिन 30 अक्टूबर की इस दुर्घटना ने एक बार फिर पिछले साल की घटनाओं और उनसे लिए गए सबक पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यात्रियों की सुरक्षा की जवाबदेही किसकी?
चारधाम यात्रा में हेलीकॉप्टर सेवाएं श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक परिवहन का माध्यम हैं, लेकिन दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में इनका संचालन मौसम और सुरक्षा मानकों के प्रति अतिरिक्त सतर्कता की मांग करता है। केवल हादसे के बाद जांच के आदेश देना पर्याप्त नहीं है। यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि मौसम संबंधी चेतावनियों के आधार पर उड़ान संचालन रोकने या जारी रखने का निर्णय किस स्तर पर और किन मानकों के तहत लिया जाता है।
अब जांच के सामने सबसे अहम सवाल यही होंगे कि क्या मौसम विभाग के अलर्ट के बावजूद हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी थी? क्या उड़ान के समय मौसम सुरक्षित था? क्या ऑपरेटर ने निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया? और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसकी जवाबदेही किसकी तय होगी?
इन सवालों के जवाब केवल इस दुर्घटना के कारणों को स्पष्ट नहीं करेंगे, बल्कि भविष्य में चारधाम यात्रा के दौरान हवाई सेवाओं में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी महत्वपूर्ण होंगे।

