1.97 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, तीन पड़ावों से होकर शीतकालीन गद्दीस्थल पहुंचेगी बाबा की उत्सव डोली
हमारी पंचायत, रुद्रप्रयाग
दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर और पंचकेदारों में तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट 6 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच कपाट बंद होने के बाद बाबा की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के लिए रवाना हो गई। इस वर्ष 1,97,424 श्रद्धालुओं ने तुंगनाथ धाम में दर्शन किए।
समुद्रतल से 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मंदिर को कपाट बंद होने के अवसर पर फूलों से सजाया गया। पुजारी वेदपाठी अभिषेक मैठाणी ने परंपरानुसार पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और बाबा के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा।
तीन पड़ावों से मक्कूमठ पहुंचेगी डोली
कपाट बंद होने के बाद उत्सव डोली का पहला रात्रि प्रवास चोपता में होगा। 7 नवंबर को डोली भनकुंड पहुंचेगी, जबकि 8 नवंबर को मर्कटेश्वर मंदिर मक्कूमठ में विराजमान होगी। अगले छह महीने तक भगवान तुंगनाथ की नियमित पूजा-अर्चना और दर्शन यहीं होंगे।
पंचकेदारों में तृतीय केदार के रूप में पूजनीय तुंगनाथ धाम में धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव की भुजाओं की पूजा होती है। इस वर्ष कपाट बंद होने की तारीख का विशेष संयोग भी रहा। वर्ष 2019, 2025 और 2026 में 6 नवंबर को ही धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हुए।
