मोहब्बेवाला बना हादसों का हॉटस्पॉट

मोहब्बेवाला बना हादसों का हॉटस्पॉट

CRRI-NHAI के निरीक्षण के डेढ़ घंटे बाद ट्रक कार पर पलटा, चार की मौत; एक साल में 18 बड़े हादसे

हमारी पंचायत, देहरादून

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे बनने के बाद मोहब्बेवाला से आशारोड़ी के बीच करीब दो किलोमीटर का हिस्सा सड़क हादसों का हॉटस्पॉट बन गया है। यहां लगातार भारी वाहनों के पलटने और अनियंत्रित होकर दूसरे वाहनों को टक्कर मारने की घटनाएं सामने आ रही हैं। बुधवार 4 नवंबर को कार पर कंटेनर पलटने से सहारनपुर के एक ही परिवार के तीन सदस्यों और चालक की मौत हो गई। हादसे में छह साल का बच्चा बच गया, लेकिन उसने अपने माता-पिता और दादी को खो दिया। हैरानी की बात यह है कि हादसे वाली जगह का निरीक्षण CRRI और NHAI की टीम ने घटना से करीब डेढ़ घंटे पहले ही किया था।

निरीक्षण के बाद भी नहीं टला हादसा

मोहब्बेवाला में लगातार हो रही दुर्घटनाओं के कारणों की जांच के लिए सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की टीम बुधवार को मौके पर पहुंची थी। टीम ने दुर्घटनास्थल का निरीक्षण किया और सड़क सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को देखा। लेकिन निरीक्षण के करीब डेढ़ घंटे बाद ही उसी क्षेत्र में भीषण हादसा हो गया।

हादसे में शामिल कंटेनर के यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े 25 चालान लंबित बताए जा रहे हैं। यह तथ्य भारी वाहनों की निगरानी और नियमों के पालन को लेकर भी सवाल खड़े करता है।

एक परिवार के चार लोगों की मौत

बुधवार को हुए हादसे में सहारनपुर निवासी जीएसटी अधिवक्ता 40 वर्षीय विश्वेश कपूर, उनकी 38 वर्षीय पत्नी निशा आनंद, 63 वर्षीय मां किरण कपूर और चालक नीरज की जान चली गई। कार में सवार विश्वेश का छह वर्षीय बेटा सुरक्षित बच गया।

सहारनपुर के मिशन कंपाउंड स्थित खेमका सदन निवासी विश्वेश अपने परिवार और चालक के साथ देहरादून आ रहे थे। उनके छोटे भाई दीपेश कपूर देहरादून के चमन विहार फेज-दो में रहते हैं। दीपेश की पत्नी गर्भवती हैं और एक-दो दिन में उनकी डिलीवरी होनी थी। इसी वजह से विश्वेश अपनी मां और परिवार के साथ देहरादून आ रहे थे।

इसी दौरान सहारनपुर की ओर से आ रहे प्लास्टिक के दानों से लदे कंटेनर ने आगे चल रहे लोडर को टक्कर मारी। इसके बाद कंटेनर अनियंत्रित होकर कार पर पलट गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार पूरी तरह पिचक गई और उसमें सवार लोगों को बाहर निकालना मुश्किल हो गया।

पुलिस और बचाव दल ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद कटर से कार को काटकर पहले बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद चारों के शव निकाले गए। हादसे के कारण एक्सप्रेसवे पर करीब ढाई घंटे तक यातायात प्रभावित रहा और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

ढलान पर भारी वाहन बन रहे खतरा

मोहंड की लंबी चढ़ाई पार करने के बाद भारी वाहन आशारोड़ी की ओर से देहरादून में प्रवेश करते हैं। इसके बाद आने वाली ढलान पर लदे हुए ट्रकों और कंटेनरों की रफ्तार बढ़ने का खतरा रहता है। ऐसे में निचले गियर का सही इस्तेमाल नहीं करना और लगातार ब्रेक लगाने से ब्रेक प्रणाली गर्म होने की आशंका रहती है। इससे चालक का वाहन पर नियंत्रण कमजोर पड़ सकता है।

सड़क की बनावट, अलाइनमेंट और स्थानीय कट भी दुर्घटनाओं के संभावित कारण माने जा रहे हैं। परिवहन विभाग के पूर्व उपायुक्त सुधांशु गर्ग और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ पहले भी इन तकनीकी पहलुओं पर चिंता जता चुके हैं।

इंतजाम हुए, लेकिन हादसे नहीं रुके

लगातार दुर्घटनाओं के बाद पुलिस-प्रशासन और संबंधित विभागों ने कई कदम उठाए हैं। सड़क पर रंबल स्ट्रिप, गति सीमा के संकेतक, रिफ्लेक्टर और जिगजैग बैरिकेडिंग लगाई गई है। भारी वाहनों की गति नियंत्रित करने और 24 घंटे निगरानी के प्रयास भी किए गए हैं। स्पीड लिमिट कैमरे लगाने की कवायद भी चल रही है।

इसके बावजूद हादसों का सिलसिला नहीं थम रहा। ऐसे में सवाल है कि क्या भारी वाहनों की गति पर नियमित और प्रभावी कार्रवाई हो रही है? क्या सड़क की ढलान, अलाइनमेंट और अन्य तकनीकी खामियों की पहचान कर उनका स्थायी समाधान किया गया है? केवल संकेतक और बैरिकेडिंग लगाने से सड़क सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती।

मंदिर निर्माण से आस्था, सुरक्षा से जुड़े सवाल बरकरार

लगातार हादसों से परेशान स्थानीय लोगों ने आशारोड़ी क्षेत्र में हनुमान मंदिर निर्माण की मांग उठाई थी। स्थानीय मान्यता है कि एक्सप्रेसवे निर्माण से पहले यहां पीपल के पुराने पेड़ थे, जहां पूजा-अर्चना होती थी। निर्माण के दौरान पेड़ कटने के बाद दुर्घटनाएं बढ़ने की बात भी स्थानीय स्तर पर कही जाती रही है।

स्थानीय विधायक विनोद चमोली ने लोगों की मांग पर मंदिर निर्माण को स्वीकृति दी थी और इसकी नींव भी रखी जा चुकी है। मंदिर निर्माण स्थानीय लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है, लेकिन दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सड़क की तकनीकी खामियों को दूर करना, भारी वाहनों की गति नियंत्रित करना और नियमों का सख्ती से पालन कराना जरूरी है।

एक साल में 18 बड़ी दुर्घटनाएं

मोहब्बेवाला क्षेत्र में पिछले एक साल के दौरान ट्रकों के पलटने, दूसरे वाहनों को टक्कर मारने और दुकानों व अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की 18 से अधिक बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद इस हिस्से में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है।

अब CRRI और NHAI के निरीक्षण के बाद हुए इस भीषण हादसे ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चार लोगों की मौत के बाद जरूरत केवल दुर्घटना के कारणों की जांच तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय करने और मोहब्बेवाला से आशारोड़ी तक के पूरे हिस्से का तकनीकी सुरक्षा ऑडिट कराकर स्थायी सुधार लागू करने की है।

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