केदारनाथ धाम में मिलेगा 24 घंटे गर्म पानी

केदारनाथ धाम में मिलेगा 24 घंटे गर्म पानी

कैबिनेट की मंजूरी के बाद देश का पहला प्रयोग, पिरुल व खच्चरों की लीद से चलेंगे बायोमास गीजर और ऊर्जा स्टोव

हमारी पंचायत, रुद्रप्रयाग

विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में आने वाले श्रद्धालुओं को अब कड़ाके की ठंड में भी चौबीसों घंटे गर्म पेयजल और स्नान के लिए गर्म पानी उपलब्ध होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड कैबिनेट की मंजूरी के बाद शुरू होने जा रही यह देश की पहली ऐसी पहल होगी, जिसमें ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में पिरुल और खच्चरों की लीद से तैयार बायोमास पैलेट्स के माध्यम से हॉट वाटर गीजर और ऊर्जा स्टोव संचालित किए जाएंगे।

इस परियोजना के तहत केदारनाथ पैदल मार्ग पर खच्चरों की लीद को सुलभ इंटरनेशनल के माध्यम से एकत्र किया जा रहा है। वहीं रुद्रप्रयाग के जंगलों से चीड़ की पत्तियां (पिरुल) स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) द्वारा एकत्र की जा रही हैं। इन दोनों के मिश्रण से सोनप्रयाग स्थित बायोमास पैलेट इकाई में फायर पैलेट्स तैयार किए जाएंगे।

इन्हीं पैलेट्स से संचालित हॉट वाटर गीजर केदारनाथ धाम में चौबीसों घंटे गर्म पेयजल और स्नान के लिए गर्म पानी उपलब्ध कराएंगे। उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इतनी अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में इस तरह की सुविधा देने वाला यह देश का पहला प्रयोग माना जा रहा है।

परियोजना के तहत बायोमास ऊर्जा स्टोव भी केदारनाथ पैदल मार्ग पर चिन्हित ढाबा संचालकों को उपलब्ध कराए जाएंगे। अनुबंध की निर्धारित सीमा तक फायर पैलेट्स, ऊर्जा स्टोव और हॉट वाटर गीजर निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे ढाबा संचालकों को स्वच्छ एवं सुविधाजनक इंधन मिल सकेगा।

हर वर्ष केदारनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को अत्यधिक ठंड के बीच गर्म पेयजल और स्नान के लिए गर्म पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इस समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

यह परियोजना प्रारंभिक तौर पर एक वर्ष के ट्रायल के रूप में संचालित होगी। इसका उद्देश्य ढाबा संचालकों को ऊर्जा संकट के समय स्वच्छ वैकल्पिक इंधन उपलब्ध कराना और श्रद्धालुओं को चौबीसों घंटे गर्म पेयजल की सुविधा देना है।

यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खच्चरों की लीद के वैज्ञानिक निस्तारण और जंगलों में बड़ी मात्रा में उपलब्ध पिरुल के उपयोग से स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन होगा। साथ ही जंगलों में आग लगने की घटनाओं पर नियंत्रण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस परियोजना का संचालन मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी रुद्रप्रयाग, डीएफओ रुद्रप्रयाग, जिला पर्यटन अधिकारी तथा हाईफीड संस्था के बीच हुए अनुबंध के तहत किया जा रहा है।

परियोजना को स्थापित करने में कई चुनौतियां भी सामने आईं। ईरान युद्ध के कारण गैस संचालित फर्नेस बनाने वाली मशीनों की आपूर्ति प्रभावित हुई, जबकि केदारनाथ यात्रा के दौरान भारी भीड़ के चलते परिवहन में भी काफी विलंब हुआ।

परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह केवल खच्चरों की लीद सुखाने का प्लांट नहीं है, बल्कि पूर्ण रूप से बायोमास फायर पैलेट्स तैयार करने का आधुनिक संयंत्र है। भविष्य में यह मॉडल स्वच्छ ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण का नया उदाहरण बन सकता है।

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