नहीं रहे उत्तराखंड के जांबाज़ पूर्व राज्यपाल एम. एम. लखेड़ा

नहीं रहे उत्तराखंड के जांबाज़ पूर्व राज्यपाल एम. एम. लखेड़ा

फौजी मोर्चों से राजभवन तक रहा प्रेरक सफर, राष्ट्रसेवा के लिए हमेशा याद किए जाएंगे

हमारी पंचायत, देहरादून

देवभूमि उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल स्थित जखण्ड गांव की मिट्टी से निकलकर भारतीय सेना के सर्वोच्च पदों और फिर राजभवन तक पहुंचने वाले लेफ्टिनेंट जनरल मदन मोहन लखेड़ा का जीवन राष्ट्रसेवा, अनुशासन और नेतृत्व की एक प्रेरक गाथा रहा। 89 वर्ष की आयु में उनके निधन के साथ देश ने एक ऐसे सेनानायक को खो दिया, जिन्होंने सैन्य और प्रशासनिक दोनों क्षेत्रों में अपनी अमिट पहचान छोड़ी।

जनरल लखेड़ा का सैन्य जीवन गोवा मुक्ति अभियान (1961), 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध तथा 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार जैसे ऐतिहासिक अभियानों से जुड़ा रहा। अपने उत्कृष्ट नेतृत्व और रणनीतिक कौशल के लिए उन्हें PVSM, AVSM और VSM जैसे सर्वोच्च सैन्य अलंकरणों से सम्मानित किया गया। लगभग चार दशकों की सेवा में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण मोर्चों पर नेतृत्व कर भारतीय सैन्य इतिहास में अपनी मजबूत पहचान बनाई।

उनकी सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक यह रही कि उन्होंने पहाड़ के युवाओं की कठिनाइयों को समझते हुए टिहरी के दोबाटा मैदान में सेना भर्ती आयोजित करवाई, जिससे सैकड़ों युवाओं को भारतीय सेना में सेवा का अवसर मिला। इस पहल ने उन्हें स्थानीय जनमानस में एक जननायक की छवि दी।

सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका राष्ट्रसेवा का क्रम जारी रहा। उन्होंने 2004 से 2006 तक पुदुच्चेरी और अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल तथा 2006 से 2011 तक मिजोरम के राज्यपाल के रूप में संवैधानिक जिम्मेदारियों का सफल निर्वहन किया। उनके कार्यकाल को प्रशासनिक ईमानदारी, संवेदनशीलता और सुशासन के लिए याद किया जाता है।

दिसंबर 2021 में राष्ट्रीय लोकनीति पार्टी ने उन्हें अपना राष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड प्रमुख नियुक्त किया था, जिसे पार्टी का सर्वोच्च सलाहकार पद माना जाता है। पार्टी ने उनके मार्गदर्शन में उत्तराखंड में “व्यवस्था परिवर्तन” और सुशासन आधारित राजनीति को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया था। पार्टी का मानना था कि उनके अनुभव और दृष्टि से राज्य में पारदर्शी और जवाबदेह शासन की नई दिशा तैयार होगी।

उत्तराखंड की साधारण पहाड़ी मिट्टी से निकलकर देश की सीमाओं, युद्धभूमियों और फिर राजभवन तक पहुंचने वाली यह यात्रा केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस विचार की कहानी है जिसमें राष्ट्रसेवा सर्वोपरि है। जनरल एम. एम. लखेड़ा का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव एक प्रेरक अध्याय बना रहेगा।

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