उत्तराखंड में अति सघन सेब बागवानी की मिसाल बने प्रदीप जिनाटा

उत्तराखंड में अति सघन सेब बागवानी की मिसाल बने प्रदीप जिनाटा

एक बीघा में 1000 सेब पौधे, आधुनिक तकनीक से तैयार किया स्मार्ट बागान; सीएम धामी और राज्यपाल ने किया सम्मानित

हमारी पंचायत, देहरादून

पहाड़ों में सीमित भूमि को आधुनिक तकनीक के सहारे बेहतर आय का माध्यम बनाने की दिशा में ग्राम भगवत निवासी प्रदीप जिनाटा ने नई मिसाल कायम की है। उन्होंने मात्र एक बीघा भूमि में 1000 से अधिक सेब के पौधे लगाकर अति सघन सेब बागवानी का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो अब उत्तराखंड में आधुनिक बागवानी की सफलता की कहानी बन रहा है। उनकी इस उपलब्धि को प्रदेश स्तर पर सराहा गया और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

प्रदीप जिनाटा ने उत्तराखंड सरकार की सेब अति सघन बागवानी योजना के तहत अपने बागान को विकसित किया। उन्होंने पारंपरिक तरीके से अलग आधुनिक तकनीक अपनाते हुए सिंगल लीडर सिस्टम (सीडलिंग आधारित रूट ) पद्धति का प्रयोग किया। इस तकनीक के माध्यम से उन्होंने कम क्षेत्रफल में अधिक पौधे लगाने और बेहतर उत्पादन की संभावनाओं को साकार किया है।

प्रदीप जिनाटा ने बताया कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने हिमाचल प्रदेश के प्रगतिशील बागवानों से सेब उत्पादन की बारीकियां सीखीं। उन्होंने वहां के बागवानों से पौध प्रबंधन, आधुनिक तकनीक, रोग नियंत्रण और बेहतर उत्पादन के तरीकों को समझा और फिर उन्हीं अनुभवों को अपने बागान में धरातल पर उतारा। लगातार सीखने, प्रयोग और मेहनत के परिणामस्वरूप आज उनका बागान अति सघन सेब बागवानी का उदाहरण बन गया है।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना को सफल बनाने में चार से पांच वर्षों तक लगातार मेहनत करनी पड़ी। मौसम की परिस्थितियों, पौधों की जरूरत और वैज्ञानिक प्रबंधन को समझते हुए उन्होंने धीरे-धीरे अपने बागान को विकसित किया। उनका यह प्रयास अब उन किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहा है, जो कम भूमि में आधुनिक खेती और बागवानी के माध्यम से बेहतर अवसर तलाश रहे हैं।

प्रदीप जिनाटा ने अपनी सफलता का श्रेय कुलदेवता खंडासुरी शैडकुलिया महाराज के आशीर्वाद, परिवार के सहयोग और ग्रामीणों के विश्वास को दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में बागवानी की अपार संभावनाएं हैं और आधुनिक तकनीक अपनाकर किसान कम भूमि में भी बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की बागवानी योजनाएं किसानों को नई तकनीक अपनाने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ा रही हैं। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में, जहां खेती योग्य भूमि सीमित है, वहां अति सघन बागवानी कम जमीन में अधिक उत्पादन और स्वरोजगार का बेहतर माध्यम बन सकती है।

प्रदीप जिनाटा ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि “जीवन में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उसके लिए परिश्रम का मार्ग ही अपनाना पड़ता है। आप जितना अधिक पुरुषार्थ करेंगे, सफलता भी उतनी ही समृद्ध और सार्थक होकर आपके कदम चूमेगी। वर्तमान समय में केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि स्मार्ट तरीके से काम करना भी जरूरी है। बागवानी क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। युवा आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़कर पहाड़ों में रहकर भी बेहतर भविष्य तैयार कर सकते हैं।”

उन्होंने कहा कि स्मार्ट बागवानी का लक्ष्य कम भूमि में अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और आर्थिक मजबूती हासिल करना है। नई तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ उत्तराखंड की बागवानी को नई पहचान दिला सकते हैं।

प्रदीप जिनाटा का यह प्रयास साबित करता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद इच्छाशक्ति, तकनीकी ज्ञान और निरंतर मेहनत के बल पर बड़े बदलाव संभव हैं। अति सघन सेब बागवानी के क्षेत्र में उनका मॉडल आने वाले समय में उत्तराखंड के किसानों और युवाओं के लिए नई राह दिखाने वाला साबित हो सकता है।

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