गांवों में भी लगेगा हाउस टैक्स! पंचायतों को मिलेगी कमाई की नई ताकत

गांवों में भी लगेगा हाउस टैक्स! पंचायतों को मिलेगी कमाई की नई ताकत

नई नियमावली से आत्मनिर्भर बनेंगी पंचायतें, यूजर चार्ज व सेस का रास्ता साफ

हमारी पंचायत, देहरादून

देहरादून। उत्तराखंड में पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित नियमावली के तहत अब ग्राम पंचायतें भी नगर निकायों की तरह भवन कर (हाउस टैक्स) और विभिन्न सेवाओं पर यूजर चार्ज वसूल सकेंगी।

पंचायती राज विभाग ने इस नई नियमावली का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और इसे अंतिम रूप देने से पहले जिलों से सुझाव लिए जा रहे हैं। जल्द ही इसे कैबिनेट में पेश किया जाएगा। इस पहल का मकसद पंचायतों को केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय खुद के संसाधन जुटाने के लिए सक्षम बनाना है।

वर्तमान में राज्य की त्रिस्तरीय पंचायतें—ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायत—मुख्य रूप से केंद्र और राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि पर निर्भर हैं। हालांकि कानून में टैक्स वसूली का प्रावधान पहले से मौजूद है, लेकिन स्पष्ट नियम न होने के कारण इसका सही उपयोग नहीं हो पा रहा था। नई नियमावली इस कमी को दूर करेगी।

प्रस्ताव के अनुसार पंचायतें स्वच्छता, सोलर लाइट, सिंचाई और ग्रामीण सड़कों जैसी सेवाओं के लिए यूजर चार्ज ले सकेंगी। इसके अलावा प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग पर सेस लगाने का अधिकार भी मिलेगा। किसी भी कर को लागू करने से पहले पंचायत को प्रस्ताव पारित कर उसका उद्देश्य स्पष्ट करना होगा।

शुरुआत में व्यावसायिक भवनों, होम स्टे, रिसॉर्ट और बड़े पक्के मकानों पर कर लगाने की योजना है, जबकि गरीब और कमजोर वर्ग के परिवारों को राहत दी जा सकती है। भवन कर की दर 50 से 200 रुपये तक प्रस्तावित है, जो भवन के आकलन पर निर्भर करेगी।

प्रदेश में वर्तमान में 7817 ग्राम पंचायतें, 89 क्षेत्र पंचायतें और 13 जिला पंचायतें कार्यरत हैं। ऐसे में यह नई व्यवस्था लागू होने पर पंचायतों की आय के नए रास्ते खुलेंगे और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।

1 Comment

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