खाली सीटों से हटेगा आरक्षण

खाली सीटों से हटेगा आरक्षण

दो बार चुनाव के बाद भी नहीं भरे 3846 पद, अब सामान्य कर तीसरी बार मतदान की तैयारी

हमारी पंचायत, देहरादून
उत्तराखंड में पंचायतों की खाली पड़ी सीटों को भरने के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया जा रहा है। ग्राम पंचायत सदस्यों के वे पद, जो अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित थे और दो बार चुनाव के बावजूद खाली रह गए, अब सामान्य श्रेणी में बदले जा सकते हैं। पंचायतीराज निदेशालय ने इस संबंध में प्रस्ताव शासन को भेज दिया है।

जानकारी के अनुसार, राज्य में ग्राम पंचायत सदस्यों के 3846 पद अब भी खाली हैं, जबकि इन पर पहले दो चरणों में चुनाव कराए जा चुके हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इन सीटों पर उम्मीदवारों की कमी के कारण बार-बार चुनाव कराने के बावजूद पद नहीं भरे जा सके। ऐसे में अब महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों को छोड़कर अन्य अधिकांश सीटों को सामान्य घोषित करने की तैयारी की जा रही है, ताकि इन पर तीसरी बार चुनाव कराकर पंचायतों का गठन पूरा किया जा सके।

इस संबंध में विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों ने भी अपने-अपने स्तर पर रिपोर्ट भेजी है, जिसमें कई आरक्षित सीटों को सामान्य करने की सिफारिश की गई है। इन प्रस्तावों के आधार पर पंचायतीराज निदेशालय ने समेकित रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी है। शासन स्तर पर मंजूरी मिलने के बाद इन सीटों पर नए सिरे से चुनाव प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय तक पद खाली रहने से ग्राम पंचायतों के गठन और कार्यप्रणाली पर असर पड़ रहा है। कई पंचायतों में वार्ड सदस्यों की कमी के कारण कोरम पूरा नहीं हो पा रहा, जिससे विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। यही कारण है कि अब व्यावहारिक समाधान के तौर पर आरक्षण हटाकर सामान्य श्रेणी में चुनाव कराने की तैयारी की जा रही है।

हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बहस भी तेज हो सकती है, क्योंकि आरक्षण व्यवस्था से जुड़े मुद्दे संवेदनशील माने जाते हैं। अब सभी की निगाहें शासन के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं, जिसके बाद आगे की चुनावी प्रक्रिया तय होगी।

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