कैशलेस इलाज से इनकार, अवैध वसूली और गुणवत्ता मानकों में खामियां मिलने पर एसएचए की सख्त कार्रवाई
हमारी पंचायत, देहरादून
आयुष्मान भारत और अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तहत मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं में अनियमितताओं पर राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) ने बड़ा कदम उठाया है। जांच में कैशलेस इलाज से इनकार, लाभार्थियों से अवैध वसूली और स्वास्थ्य सेवाओं के निर्धारित मानकों के उल्लंघन के मामले सामने आने के बाद तीन अस्पतालों की संबद्धता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है। वहीं एक अस्पताल पर आर्थिक दंड लगाते हुए निर्धारित समय सीमा में कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्राधिकरण के अनुसार बरेली स्थित एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के खिलाफ पर्वतीय जिलों से रेफर होकर पहुंचे मरीजों को भर्ती न करने और कैशलेस उपचार से वंचित करने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। जांच में कई मामलों में वैध रेफरल होने के बावजूद मरीजों को वापस लौटाने और उपचार के लिए धनराशि वसूलने की बात सामने आई। मामले को गंभीर मानते हुए अस्पताल की संबद्धता निलंबित कर दी गई है। हालांकि पहले से भर्ती मरीजों का उपचार जारी रहेगा।
देहरादून के ओजस्वी अस्पताल पर भी कार्रवाई की गई है। जांच में पाया गया कि एक लाभार्थी से उपचार के दौरान धनराशि वसूली गई, जबकि योजना के तहत उसे कैशलेस सुविधा मिलनी चाहिए थी। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी और दस्तावेजी व्यवस्थाओं में भी खामियां मिलीं। अस्पताल पर 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के साथ उसकी संबद्धता भी निलंबित कर दी गई है।
अरिहंत अस्पताल में डायलिसिस सेवाओं और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था को लेकर गंभीर कमियां सामने आईं। निरीक्षण टीम को मरीज सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, चिकित्सकीय निगरानी और प्रयोगशाला सत्यापन से जुड़े कई मानकों का पालन होता नहीं मिला। इसके चलते अस्पताल की संबद्धता भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई है। अस्पताल को सुधारात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं बलूनी अस्पताल पर आयुष्मान लाभार्थी से अवैध वसूली के मामले में 86,250 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जांच में अस्पताल द्वारा धन वापसी का दावा किया गया, लेकिन इसके समर्थन में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में साफ-सफाई, आधारभूत सुविधाओं और आईसीयू व्यवस्था से जुड़ी कई खामियां भी पाई गईं। अस्पताल को 15 दिनों के भीतर सभी कमियां दूर करने का निर्देश दिया गया है। ऐसा न होने पर उसकी संबद्धता निलंबित की जा सकती है।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि आयुष्मान योजनाओं के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों को निर्धारित नियमों और गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन करना होगा। लाभार्थियों के अधिकारों से समझौता करने वाले संस्थानों के खिलाफ भविष्य में भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
