अनिरुद्ध सम्मेलन से खेती को नई राह

अनिरुद्ध सम्मेलन से खेती को नई राह

500 से अधिक किसान एक मंच पर जुटे, आधुनिक तकनीक, वित्त, महिला सशक्तिकरण और बाज़ार से जुड़ने का मिला रोडमैप

हमारी पंचायत, देहरादून

खेती को लाभकारी और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में विकासनगर स्थित अनिरुद्ध आश्रम में आयोजित दो दिवसीय ‘उत्तराखंड अनिरुद्ध किसान सम्मेलन’ किसानों के लिए नई सोच और नए अवसरों का मंच बनकर उभरा। प्रदेशभर से आए 500 से अधिक किसानों ने कृषि वैज्ञानिकों, बैंकिंग विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण उद्यमियों के साथ संवाद कर आधुनिक खेती, वित्तीय संसाधनों, महिला सहभागिता और बेहतर बाज़ार से जुड़ने की नई संभावनाओं पर मंथन किया। सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि ज्ञान, तकनीक और बाज़ार के समन्वय से ही उत्तराखंड की खेती को आत्मनिर्भर और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

उत्तराखंड के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, वित्तीय संसाधनों और बेहतर बाजार से जोड़ने की दिशा में विकासनगर स्थित अनिरुद्ध आश्रम में आयोजित दो दिवसीय ‘उत्तराखंड अनिरुद्ध किसान सम्मेलन’ नई उम्मीद का मंच बनकर उभरा। स्वर्गीय अनिरुद्ध कुमार की स्मृति में आयोजित इस सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 500 से अधिक किसानों ने भाग लिया। कृषि विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, बैंकिंग संस्थानों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण उद्यमियों ने किसानों के साथ संवाद कर उन्हें खेती के बदलते स्वरूप, आधुनिक तकनीकों और बाजार की संभावनाओं से अवगत कराया।

सम्मेलन का आयोजन Kiwi Kisan Window (KIWI) के सह-संस्थापक अभिनव आहलूवालिया एवं नुपुर ने स्वर्गीय अनिरुद्ध कुमार के परिजनों के सहयोग से किया। कार्यक्रम का केंद्रीय विषय ‘ज्ञान, सम्मान और बाज़ार’ रहा, जिसका उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर और बाजारोन्मुख खेती के लिए तैयार करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्वर्गीय अनिरुद्ध कुमार को श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया। वक्ताओं ने उन्हें जौनसार-बावर क्षेत्र में नकदी फसलों को बढ़ावा देने वाला दूरदर्शी किसान नेता बताते हुए वर्ष 2005 में किसानों के हितों के लिए वैट कानून के खिलाफ किए गए उनके संघर्ष को याद किया।

मुख्य अतिथि राज्य मंत्री खजान दास ने कहा कि किसानों की आर्थिक समृद्धि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने आधुनिक तकनीक, बेहतर विपणन व्यवस्था और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम किसान तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ऐसे सम्मेलन किसानों और विशेषज्ञों के बीच मजबूत संवाद का माध्यम बन रहे हैं।

विशिष्ट अतिथि एवं विकासनगर विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने कहा कि उत्तराखंड की वास्तविक शक्ति उसके गांव और किसान हैं। खेती को लाभकारी बनाने के लिए किसानों को नई तकनीक, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने अनिरुद्ध किसान सम्मेलन को प्रेरणादायी पहल बताते हुए कहा कि स्वर्गीय अनिरुद्ध कुमार का किसानों के अधिकारों के लिए किया गया संघर्ष आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा।

सम्मेलन के दौरान प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए 24 प्रगतिशील किसानों को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए ‘किसान सम्मान पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि देश की अन्न व्यवस्था को मजबूत रखने वाले किसानों का सम्मान समाज की सर्वोच्च प्राथमिकता होना चाहिए।

सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में कृषि वित्त, किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि ऋण, सरकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता जैसे विषयों पर भारतीय स्टेट बैंक, उत्तराखंड ग्रामीण बैंक, नाबार्ड, कृषि विज्ञान केंद्र तथा पशु प्रजनन विभाग के विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी दी। दूसरे सत्र में ‘कृषि में महिलाओं की भूमिका’ विषय पर महिला जनप्रतिनिधियों, कृषि अधिकारियों और शिक्षाविदों ने महिला कृषकों को तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

सम्मेलन परिसर में लगाए गए 17 कृषि एवं ग्रामीण उद्यमिता स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे। इनमें आधुनिक कृषि ड्रोन, जैविक उत्पाद, कृषि उपकरण, पारंपरिक हस्तशिल्प और विभिन्न नवाचारों का प्रदर्शन किया गया, जिससे किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और नए व्यावसायिक अवसरों की जानकारी मिली।

‘ओपन माइक’ सत्र में छह प्रगतिशील किसानों ने प्राकृतिक खेती, बागवानी, विपणन और तकनीकी नवाचारों के अपने सफल अनुभव साझा किए। किसानों ने कहा कि इस प्रकार का अनुभव साझा करने का मंच ग्रामीण कृषि को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

सम्मेलन के समापन पर Kiwi Kisan Window (KIWI) ने कहा कि संस्था हिमालयी राज्यों के किसानों को आधुनिक तकनीक, वित्तीय पहुंच और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। संस्था का उद्देश्य किसान-प्रथम दृष्टिकोण के साथ ग्रामीण और महिला कृषकों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच से जोड़ना है।

दो दिनों तक चले इस सम्मेलन ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि किसान, वैज्ञानिक, बैंकिंग संस्थान, सरकार और बाजार एक साझा मंच पर मिलकर कार्य करें तो खेती को अधिक लाभकारी, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। इस अवसर पर उद्यान विज्ञानी कुंदन सिंह पंवार, उद्यानपति महाबल नेगी, उद्यमी सुरेश चौहान, बिल्लू भाई सहित करीब दो दर्ज़न बागवानों एवं कृषकों को सम्मान्नित किया गया।

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