तीन लोकभाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग

तीन लोकभाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग

लोक भाषा मंच ने भाषा मंत्री को सौंपा ज्ञापन, अकादमी गठन की भी मांग

हमारी पंचायत, देहरादून

उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली ने गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाई है। मंच के संयोजक दिनेश ध्यानी ने भाषा मंत्री खजानदास को ज्ञापन सौंपकर विधानसभा के आगामी सत्र में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने का आग्रह किया।

ज्ञापन में कहा गया कि गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी में लंबे समय से साहित्य सृजन हो रहा है और इन भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संस्थागत प्रयास जरूरी हैं। मंच ने तीनों भाषाओं के लिए अलग अकादमी गठित करने की भी मांग की।

ध्येय ने संविधान के अनुच्छेद 345 के तहत राज्य स्तर पर इन भाषाओं को मान्यता देने का भी आग्रह किया। मंच का कहना है कि आठवीं अनुसूची में शामिल न होने वाली भाषा को भी राज्य अपने स्तर पर आधिकारिक उपयोग के लिए मान्यता दे सकता है।

ज्ञापन देने वालों में गढ़वाली भाषा के अध्येता आशीष सुंदरियाल समेत अन्य लोग शामिल रहे। ध्यानी के अनुसार, भाषा मंत्री ने मांगों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया है।

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