SIR पर विपक्ष को धामी का जवाब, बोले- कांग्रेस फैला रही भ्रम

SIR पर विपक्ष को धामी का जवाब, बोले- कांग्रेस फैला रही भ्रम

हमारी पंचायत, देहरादून

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस और इंडी गठबंधन के विरोध पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पलटवार किया है। उन्होंने विपक्ष पर भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाना कांग्रेस के दोहरे मापदंड को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री धामी ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण पहले भी होता रहा है। उस समय कांग्रेस को इस प्रक्रिया से कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन अब उसी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को अपने शासनकाल का इतिहास भी देखना चाहिए।

मुख्यमंत्री के अनुसार, SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो सके। उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता बनाए रखना उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

राजनीतिक हताशा में संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल

मुख्यमंत्री धामी ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन के विरोध को राजनीतिक हताशा से जोड़ते हुए कहा कि जनता का विश्वास खो चुकी कांग्रेस संवैधानिक प्रक्रियाओं पर अनावश्यक विवाद खड़ा कर रही है। उनके मुताबिक, विपक्ष ऐसा करके अपनी राजनीतिक विफलताओं से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि देश विकास, सुशासन और राष्ट्रहित के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी घटती राजनीतिक प्रासंगिकता से असहज है और इसी कारण जनहित तथा पारदर्शिता से जुड़े विषयों पर भी भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।

लोकतंत्र में विरोध हो, लेकिन तथ्यों के आधार पर

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध का अपना स्थान है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति जनता में अनावश्यक अविश्वास पैदा करना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस से तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखने की अपील की।

SIR को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जारी बयानबाजी के बीच मुख्यमंत्री का यह बयान राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है। जहां सरकार मतदाता सूची के पुनरीक्षण को पारदर्शिता और शुद्धता से जुड़ी प्रक्रिया बता रही है, वहीं विपक्षी दल इस प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां उठा रहे हैं।

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