नई शिक्षा व्यवस्था के तीन महीने से अटका मिड-डे मील, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने शासन से मांगा हस्तक्षेप
हमारी पंचायत, देहरादून
उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था बदलने की प्रक्रिया के बीच सैकड़ों बच्चों को मिलने वाला मिड-डे मील अटक गया है। मदरसा बोर्ड की जगह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की नई व्यवस्था लागू होने के बाद मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पहले मदरसा बोर्ड से पंजीकृत 452 मदरसों के बच्चों को शिक्षा विभाग के माध्यम से मिड-डे मील दिया जाता था। अब नई व्यवस्था में इन संस्थानों की स्थिति को लेकर विभागीय असमंजस बना हुआ है। तीन महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद समाधान नहीं निकलने पर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने शासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
राज्य में एक जुलाई से अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था लागू की गई थी। इससे पहले मदरसा बोर्ड के माध्यम से संस्थानों का संचालन और पंजीकरण होता था। नई व्यवस्था में मदरसों को प्राधिकरण के तहत पंजीकृत कराने की प्रक्रिया चल रही है। इसी बदलाव के बीच बच्चों के मिड-डे मील का मामला भी उलझ गया है। प्राधिकरण की ओर से शिक्षा विभाग को कई बार पत्र लिखकर पात्र संस्थानों के बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था जारी रखने का अनुरोध किया गया है, लेकिन अब तक इस संबंध में निर्णय नहीं हो पाया है।
प्राधिकरण ने कई बार लिखा पत्र
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष सुरजीत गांधी के अनुसार, बच्चों को मिड-डे मील उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा विभाग को कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं। पहले मदरसा बोर्ड से पंजीकृत संस्थानों में यह सुविधा दी जा रही थी। ऐसे में नई व्यवस्था के तहत पंजीकरण कराने वाले मदरसों के बच्चों के लिए भी भोजन की व्यवस्था किए जाने की मांग की गई है।
गांधी के मुताबिक, विभाग स्तर पर समाधान नहीं निकलने के बाद अब शासन से अनुरोध किया गया है कि संबंधित विभाग के साथ बैठक कर इस मामले में जल्द निर्णय लिया जाए। इससे बच्चों को मिलने वाली सुविधा को लेकर बनी अनिश्चितता दूर हो सकेगी।
245 मदरसे बंद, करीब 130 के आवेदन लंबित
नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य में मदरसों की स्थिति भी बदलाव के दौर से गुजर रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल 452 मदरसों में से 245 बंद किए जा चुके हैं। इनमें 17 मदरसे सील किए गए हैं। एक मदरसे की ओर से अब तक पंजीकरण के लिए आवेदन नहीं किया गया है, जबकि करीब 130 मदरसों के पंजीकरण आवेदन शिक्षा विभाग में लंबित हैं।
पंजीकरण की प्रक्रिया और मिड-डे मील की सुविधा का मामला एक-दूसरे से जुड़ने के कारण स्थिति और जटिल हो गई है। ऐसे में बच्चों को भोजन की सुविधा कब से मिलेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
शिक्षा विभाग ने बताई नियमों की अड़चन
प्रारंभिक शिक्षा के प्रभारी निदेशक कुंवर सिंह रावत के अनुसार, पहले ये संस्थान मदरसा बोर्ड से पंजीकृत थे। भारत सरकार के पत्र के आधार पर इन्हें मिड-डे मील की सुविधा दी जा रही थी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद विभाग इन्हें निजी विद्यालय की श्रेणी में देख रहा है, जिसके चलते मिड-डे मील देने में नियमों से जुड़ी अड़चन सामने आ रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस विषय पर बातचीत जारी है।
विभागीय पक्ष के अनुसार, केंद्र सरकार से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट कराने के लिए पत्र भेजे जाने की संभावना है। इसके बाद ही आगे की व्यवस्था तय हो सकेगी।
बच्चों के भोजन पर फैसले का इंतजार
नई शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य संस्थानों को नियमन के दायरे में लाना है, लेकिन इस प्रक्रिया के बीच बच्चों को मिलने वाली भोजन सुविधा प्रभावित होना चिंता का विषय है। पंजीकरण, मान्यता और विभागीय अधिकार क्षेत्र से जुड़े सवालों का समाधान प्रशासनिक स्तर पर होना है। फिलहाल, बच्चों को मिड-डे मील उपलब्ध कराने पर फैसला लंबित है। अब नजर शासन और शिक्षा विभाग की अगली बैठक पर है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि नई व्यवस्था के तहत किन संस्थानों के बच्चों को यह सुविधा मिलेगी और इसे दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया क्या होगी।

