1,200 लोगों के उजड़ने का डर, विधानसभा के बाहर धरना
हमारी पंचायत, देहरादून
राजधानी देहरादून में ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए प्रस्तावित एलिवेटेड रोड अब स्थानीय लोगों के विरोध के कारण चर्चा में है। मोहकमपुर से अजबपुर फ्लाईओवर तक प्रस्तावित सड़क के नए अलाइनमेंट को लेकर प्रभावित परिवारों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इससे 300 से अधिक घर प्रभावित हो सकते हैं और 1,200 से ज्यादा लोगों के सामने आशियाना छिनने का खतरा पैदा हो गया है। विरोध में लोगों ने विधानसभा के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।
स्थानीय लोग पुराने अलाइनमेंट पर दोबारा विचार करने की मांग कर रहे हैं। वहीं, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) का कहना है कि विभिन्न विकल्पों के अध्ययन के बाद ऐसा रूट चुना गया है, जिसमें मकानों और अन्य संरचनाओं को अपेक्षाकृत कम नुकसान होगा। ऐसे में विकास परियोजना और प्रभावित परिवारों के हितों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती सामने है।
नए अलाइनमेंट पर क्यों बढ़ा विवाद?
देहरादून में राष्ट्रीय राजमार्ग-7 पर बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए मोहकमपुर से आशारोड़ी तक एलिवेटेड रोड की योजना प्रस्तावित है। इसके तहत मोहकमपुर से अजबपुर फ्लाईओवर तक रेलवे लाइन के समानांतर सड़क बनाने की योजना को लेकर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है।
प्रभावित परिवारों का कहना है कि पहले सड़क को मौजूदा हाईवे के ऊपर से ले जाने का विकल्प चर्चा में था, लेकिन बाद में अलाइनमेंट बदल दिया गया। अब नए रूट की जद में उनके मकान और जमीन आने की आशंका है। लोगों के मुताबिक, घरों पर निशान लगाए जाने के बाद उन्हें परियोजना के संभावित प्रभाव का पता चला। इसके बाद प्रभावित परिवारों ने एकजुट होकर 14 अक्टूबर से विधानसभा के बाहर धरना शुरू कर दिया।
घरों के साथ रोजगार छिनने का डर
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कई परिवार दशकों से रह रहे हैं। कुछ मकानों के नक्शे वर्षों पहले नगरपालिका से स्वीकृत हुए थे। लोगों ने अपनी जीवनभर की कमाई घर बनाने में लगा दी है। कई परिवारों की आजीविका घरों से जुड़ी दुकानों और छोटे कारोबार पर निर्भर है।
मोहकमपुर-आशारोड़ी एलिवेटेड रोड संघर्ष समिति के संयोजक सुशील कुमार का कहना है कि प्रभावित परिवारों के लिए घर और रोजगार दोनों बचाना जरूरी है। यदि मकान टूटते हैं, तो लोगों के सामने रहने के साथ आजीविका का भी संकट खड़ा हो जाएगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि परियोजना पहले से प्रस्तावित थी, तो प्रभावित क्षेत्र में मकानों के नक्शे कैसे स्वीकृत होते रहे और जमीनों की रजिस्ट्रियां कैसे होती रहीं?
300 घरों और 1,200 लोगों पर असर का दावा
स्थानीय निवासी पारितोष भटनागर के अनुसार, नए अलाइनमेंट से 300 से अधिक मकान प्रभावित हो सकते हैं और 1,200 से ज्यादा लोगों पर इसका असर पड़ने की आशंका है। उनका कहना है कि इसका प्रभाव केवल उन घरों तक सीमित नहीं रह सकता, जिन पर निशान लगाए गए हैं। सड़क के आसपास की अन्य आवासीय संपत्तियों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
भटनागर ने कहा कि क्षेत्र में बुजुर्गों समेत ऐसे कई परिवार हैं, जिन्होंने जीवनभर की कमाई से अपने घर बनाए हैं। इस उम्र में उनके लिए दूसरी जगह मकान बनाना आसान नहीं होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लोगों को समय रहते परियोजना की जानकारी नहीं मिली और उन्हें अपनी आपत्तियां रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
स्थानीय निवासी उषा पंवार ने भी कहा कि उन्हें परियोजना की जानकारी घर पर निशान लगाए जाने के बाद मिली। उनका कहना है कि लोग सड़क निर्माण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन ऐसा विकल्प चाहते हैं, जिससे उनके घरों को नुकसान न पहुंचे।
पुराने रूट और वैकल्पिक मार्गों की मांग
प्रभावित लोगों ने सरकार से हस्तक्षेप कर मौजूदा अलाइनमेंट पर दोबारा विचार करने की मांग की है। स्थानीय निवासी त्रिलोक सिंह नेगी के मुताबिक, मोहकमपुर से आशारोड़ी तक करीब 12.7 किलोमीटर के हिस्से में सड़क चौड़ीकरण और एलिवेटेड रोड से जुड़ी अलग-अलग व्यवस्थाएं प्रस्तावित हैं।
नेगी का कहना है कि संबंधित विभाग से संपर्क करने पर लोगों को बताया गया कि निर्माण विभाग को उपलब्ध जमीन के आधार पर किया जाएगा और इस मामले में राज्य सरकार से बात करनी होगी।
73 वर्षीय विनोद कुमार वर्मा के मुताबिक, संघर्ष समिति ने प्रभावित लोगों की आपत्तियां दर्ज कराई हैं। भूमि अध्याप्ति अधिकारी की ओर से उन्हें 23 अक्टूबर को बुलाया गया है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि एलिवेटेड रोड के लिए पहले प्रस्तावित मोहकमपुर से रिस्पना पुल वाले मार्ग पर दोबारा विचार किया जाए। इसके साथ ही डोईवाला, मोथरोवाला, बंजारावाला और दुधली रोड जैसे वैकल्पिक रास्तों पर भी विचार करने की मांग की गई है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर सुनवाई नहीं होने पर आंदोलन को जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक ले जाया जाएगा।
NHAI ने बताया नए रूट को बेहतर विकल्प
विवाद पर NHAI के अधिकारी सौरभ सिंह ने विभाग का पक्ष रखते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग-7 पर प्रिंस चौक से जोगीवाला तक यातायात का दबाव काफी अधिक है। इस समस्या के समाधान के लिए कंसल्टेंट से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कराई गई और कई विकल्पों का अध्ययन किया गया।
उनके मुताबिक, पुराने अलाइनमेंट पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने से बड़ी संख्या में मकान और अन्य संरचनाएं प्रभावित हो सकती थीं। मौजूदा हाईवे को चौड़ा करने में भी दोनों ओर घनी आबादी और बड़ी इमारतें होने के कारण कठिनाइयां थीं। ऐसे में रेलवे लाइन के साथ उपलब्ध जमीन पर नए अलाइनमेंट की संभावना तलाशी गई।
सौरभ सिंह ने बताया कि विभाग के अध्ययन में इस विकल्प से अपेक्षाकृत कम मकान और संरचनाएं प्रभावित होने की बात सामने आई। इसी आधार पर नए अलाइनमेंट को स्वीकृति दी गई है।
सर्वे के बाद तय होगा मुआवजा
NHAI के अनुसार, फिलहाल नए रूट पर प्रभावित होने वाले मकानों और जमीनों का आकलन करने के लिए सर्वे और मार्किंग की जा रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि किस संपत्ति का कितना हिस्सा परियोजना की जद में आ रहा है।
सौरभ सिंह के मुताबिक, सर्वे पूरा होने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के प्रावधानों के तहत नियमानुसार मुआवजा निर्धारित किया जाएगा। देहरादून में विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (SLO) के माध्यम से जमीन और उस पर बनी संरचनाओं के मुआवजे का आकलन किया जाएगा। मुआवजे की राशि संबंधित क्षेत्र और लागू नियमों के आधार पर तय होगी।
फिलहाल परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों और NHAI के बीच मतभेद बने हुए हैं। एक ओर प्रभावित परिवार अपने घर बचाने और पुराने अलाइनमेंट पर दोबारा विचार करने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर NHAI नए रूट को कम नुकसान वाला विकल्प बता रहा है। अब निगाहें सर्वे के नतीजों, प्रभावित परिवारों की आपत्तियों और सरकार के अगले कदम पर हैं।
