सचिवालय में पांच तबादले, नीति पर सवाल

सचिवालय में पांच तबादले, नीति पर सवाल

पांच साल से एक ही अनुभाग में जमे अधिकारी, नियमों के पालन पर उठी उंगली

हमारी पंचायत, देहरादून

उत्तराखंड सचिवालय में स्थानांतरण नीति के पालन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। शासन ने सचिवालय सेवा के पांच अधिकारियों के तबादले किए हैं, लेकिन लंबे समय से एक ही अनुभाग और जिम्मेदारी पर जमे अधिकारियों को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। सचिवालय में कई अनुभाग अधिकारी पांच साल से अधिक समय से एक ही अनुभाग में तैनात हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब शासन अपनी ही स्थानांतरण नीति को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर पा रहा है, तो अन्य विभागों में इसके पालन की उम्मीद कैसे की जाए?

पांच अधिकारियों की नई तैनाती

शासन की ओर से जारी आदेश के तहत सचिवालय सेवा के पांच अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। इनमें रमेश जोशी, वंदना असवाल, विनीता पवार, कुंदन सिंह भंडारी और राकेश कुमार शामिल हैं।

अनुभाग अधिकारी रमेश जोशी को माध्यमिक शिक्षा अनुभाग में भेजा गया है। इससे पहले उन्हें सचिवालय प्रशासन से न्याय विभाग में तैनात किया गया था। अब पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए उन्हें माध्यमिक शिक्षा अनुभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इसी तरह अनुभाग अधिकारी वंदना असवाल को पर्यटन विभाग से न्याय विभाग के अनुभाग-दो में भेजा गया है। विनीता पवार को गृह विभाग से पर्यटन विभाग में तैनाती दी गई है, जहां वह अनुभाग-दो का काम देखेंगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय में अनुभाग-चार की जिम्मेदारी संभाल रहे कुंदन सिंह भंडारी को गृह विभाग के अनुभाग-चार में भेजा गया है। वहीं, राकेश कुमार को श्रम विभाग से गृह विभाग के अनुभाग-पांच में तैनात किया गया है।

पांच साल से एक ही अनुभाग में जमे अधिकारी

इन तबादलों के बीच सचिवालय में लंबे समय से एक ही अनुभाग में काम कर रहे अधिकारियों का मुद्दा फिर चर्चा में है। जानकारी के अनुसार, कई अनुभाग अधिकारी पांच साल से अधिक समय से एक ही अनुभाग में तैनात हैं। स्थानांतरण नीति के तहत ऐसे अधिकारियों की तैनाती की समीक्षा और आवश्यक बदलाव किए जाने की अपेक्षा है, लेकिन इस दिशा में अब तक व्यापक कार्रवाई नहीं हो सकी है।

सचिवालय सेवा के अधिकारियों के लिए पहले स्थानांतरण नीति बनाई गई थी। इससे उम्मीद जगी थी कि अधिकारियों की तैनाती और तबादलों में निर्धारित नियमों का पालन होगा। हालांकि, नीति बनने के बावजूद लंबे समय से एक ही जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों के मामलों में अपेक्षित बदलाव नहीं दिखाई दे रहा है।

सचिवालय सेवा संघ भी उठा चुका है मुद्दा

सचिवालय सेवा संघ भी अधिकारियों की तैनाती में नियमों के पालन की मांग उठाता रहा है। संघ का जोर रहा है कि सचिवालय सेवा के अधिकारियों के स्थानांतरण और तैनाती निर्धारित मानकों के अनुरूप किए जाएं, ताकि लंबे समय तक एक ही अनुभाग में पदस्थ रहने की स्थिति से बचा जा सके।

मौजूदा स्थिति में सवाल केवल पांच अधिकारियों के तबादलों का नहीं, बल्कि पूरी स्थानांतरण व्यवस्था को प्रभावी बनाने का है। सचिवालय में अनुभाग अधिकारी स्तर पर कई बदलाव किए जाने की जरूरत बताई जा रही है। इसके साथ ही समीक्षा अधिकारी के पदों पर भी बड़े स्तर पर फेरबदल की आवश्यकता जताई जा रही है।

मुख्य सचिव के निर्देशों के बावजूद सवाल

हैरानी की बात यह है कि मुख्य सचिव आनंद वर्धन भी स्थानांतरण नीति लागू करने की बात कह चुके हैं। इसके बावजूद सचिवालय में ही नीति के अनुरूप तबादलों को लेकर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाने पर सवाल उठ रहे हैं।

अब देखना होगा कि शासन लंबे समय से एक ही अनुभाग में तैनात अधिकारियों के मामलों की समीक्षा कर स्थानांतरण नीति के अनुरूप बदलाव करता है या फिर पांच अधिकारियों के हालिया तबादलों तक ही कार्रवाई सीमित रहती है।

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