हरिद्वार के प्राचीन शक्तिपीठ में दर्शन को पहुंचे श्रद्धालु, सुख-समृद्धि की कामना की
हमारी पंचायत, हरिद्वार
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन धर्मनगरी हरिद्वार के प्राचीन मां मायादेवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही मां के दर्शन और पूजन के लिए भक्तों की कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने पुष्प, नारियल और प्रसाद अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। नवरात्रि के अवसर पर मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया है, जिससे मंदिर परिसर में उत्सव का माहौल बना हुआ है।
हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल मायादेवी मंदिर को 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां माता सती की नाभि गिरी थी। इसी वजह से इस मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व है। नवरात्रि के दौरान स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ पंजाब और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्त मां के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

माता सती और भगवान शिव से जुड़ी है मान्यता
मंदिर का इतिहास माता सती, भगवान शिव और राजा दक्ष से जुड़ी पौराणिक कथा से संबंधित है। मान्यता के अनुसार, राजा दक्ष ने कनखल में यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया। पिता के यज्ञ में पहुंचीं माता सती अपने पति का अपमान सहन नहीं कर सकीं और उन्होंने यज्ञ में अपने प्राण त्याग दिए। इसके बाद भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर विचरण करने लगे।
धार्मिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि का संतुलन बनाए रखने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को खंडित किया। जिन स्थानों पर उनके अंग गिरे, उन्हें शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाने लगा। मायादेवी मंदिर भी इसी पौराणिक परंपरा से जुड़ा माना जाता है।
जूना अखाड़ा करता है मंदिर का संचालन
मायादेवी मंदिर का इतिहास 11वीं शताब्दी से जुड़ा माना जाता है। मंदिर का संचालन श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा करता है। मां मायादेवी को हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी भी माना जाता है। प्राचीन समय में हरिद्वार को मायापुरी के नाम से जाना जाता था। गंगा स्नान और अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु मां के दरबार में शीश नवाना भी नहीं भूलते।
मंदिर के मुख्य पुजारी भास्कर पुरी महाराज के अनुसार, माता सती का यह धाम विशेष धार्मिक मान्यता रखता है। नवरात्रि के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और मां से मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।

श्रद्धालुओं में दर्शन-पूजन को लेकर उत्साह
पंजाब से आए श्रद्धालु विक्रम कपूर ने बताया कि जब भी वह हरिद्वार आते हैं, मां मायादेवी के दर्शन जरूर करते हैं। उन्होंने कहा कि इस शक्तिपीठ के प्रति उनकी गहरी आस्था है और उन्हें मां की कृपा पर विश्वास है।
श्रद्धालु अलका ने भी मंदिर को महत्वपूर्ण शक्तिपीठ बताते हुए कहा कि यहां वर्षभर भक्त दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन नवरात्रि में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। वहीं, दीपक शर्मा ने बताया कि वह कई वर्षों से मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए आ रहे हैं और मां के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा है।
नवरात्रि के दिनों में मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और सुबह-शाम आरती की जाती है। हरिद्वार रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्रि के पहले दिन उमड़ी भीड़ ने धर्मनगरी में त्योहार के उल्लास और धार्मिक उत्साह को दर्शाया।
